Patna: बिहार में पिछले दो दशकों के दौरान ग्रामीण महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आया है। जीविका दीदी (बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन सोसायटी) के 20 वर्षों के इस सफर ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है।
जीविका के दो दशक: महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की अनूठी कहानी
वर्ष 2006 में अलग-अलग जिलों के मात्र छह प्रखंडों से स्वयं सहायता समूहों की शुरुआत हुई थी। आज यह नेटवर्क बढ़कर राज्यभर में 13.06 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का एक विशाल रूप ले चुका है।
व्यापक नेटवर्क: मौजूदा समय में राज्य के 1.81 करोड़ परिवार इन एसएचजी से जुड़ चुके हैं। इसके साथ ही 77,787 ग्राम संगठन और 1,683 संकुल स्तरीय संघ इस सामुदायिक नेटवर्क को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।
वित्तीय सहायता और बैंक सखियां: एसएचजी के माध्यम से महिलाओं को अब तक करीब 76,549 करोड़ रुपये का बैंक ऋण मिल चुका है। गांवों में वित्तीय सेवाओं की मजबूत कड़ी के रूप में 6,771 बैंक सखियां काम कर रही हैं, जिनके माध्यम से बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन हो रहा है।
लखपति दीदी अभियान: महिला सशक्तिकरण का यह सफर अब ‘लखपति दीदी’ अभियान के जरिए नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मार्च 2029 तक 94.71 लाख लखपति दीदियां बनाने के लक्ष्य के तहत अब तक 50.40 लाख से अधिक महिलाओं को इस श्रेणी में शामिल किया जा चुका है।
ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कुछ खास मिसालें
बबली देवी (किशनगंज): ठाकुरगंज प्रखंड की बबली देवी ने 2018 में समूह से जुड़कर फल की दुकान शुरू की। 2021 में वह बैंक सखी बनीं और ग्राहक सेवा केंद्र चलाकर आज बैंकिंग, फल बिक्री और सिलाई से सालाना डेढ़ लाख से अधिक की कमाई कर रही हैं।
अंजू कुमारी (अरवल): कलेर प्रखंड की अंजू कुमारी वर्ष 2018 में जीविका से जुड़ीं और कावेरी ग्राम संगठन के सहयोग से ग्राहक सेवा केंद्र चलाकर हर दिन 2.5 लाख से अधिक का ट्रांजैक्शन कर रही हैं।
आमना खातून (शिवहर): दोस्तिया गांव की आमना खातून ने 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 40 हजार का ऋण लिया और आज लहठी उद्योग के जरिए सालाना 5 से 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाते हुए 20 लाख तक का टर्नओवर हासिल कर चुकी हैं।
सरकार की पहल और मातृ शक्ति का सम्मान
ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बच्चियों को शिक्षा का बेहतर माहौल दिया, नशाबंदी लागू की और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत तथा स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें आगे बढ़ाया। जीविका की दीदियां आज स्वच्छ और समृद्ध बिहार की परिकल्पना को साकार कर रही हैं।





