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संविदा पर तैनात एंबुलेंस चालकों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने नियमितीकरण पर निर्णय लेने का दिया आदेश

18 साल की सेवा के बाद जगी उम्मीद, हजारीबाग के संविदा एंबुलेंस चालकों के नियमितीकरण पर 12 हफ्ते में कार्रवाई का आदेश
हाईकोर्ट
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Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग जिले में करीब दो दशकों से संविदा पर कार्यरत एंबुलेंस चालकों की सेवा को नियमित करने के मामले में बड़ा निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने हजारीबाग के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CMO) को आदेश दिया है कि वे 12 सप्ताह के भीतर इन चालकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पर विधिसम्मत कार्रवाई पूरी करें।

18 साल से लगातार दे रहे हैं सेवाएं

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता संतोष कुमार एवं अन्य की नियुक्ति वर्ष 2008 में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत संविदा के आधार पर एंबुलेंस चालक के रूप में हुई थी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में करीब 18 वर्षों तक लगातार दिन-रात अपनी सेवाएं देने के बावजूद इन कर्मचारियों का नियमितीकरण लंबित पड़ा रहा। वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार चालकों ने अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
अदालत में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि चालकों ने अपनी उम्र का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य विभाग की अनिवार्य सेवाओं में समर्पित किया है, इसलिए उनकी सेवाओं को स्थायी किया जाना न्यायोचित है। दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हजारीबाग सिविल सर्जन को 12 सप्ताह की तय समय-सीमा के भीतर नियमानुसार समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया। इस फैसले से लंबे समय से स्थायीकरण की राह देख रहे संविदा कर्मचारियों में नई उम्मीद जागी है।
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