रांची : झारखंड में डायबिटीज यानी मधुमेह के मरीजों की पहचान में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) झारखंड के एनसीडी कार्यक्रम के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जांच के दौरान 1,45,548 लोगों में डायबिटीज की पुष्टि हुई है। जबकि 2024-25 में यह संख्या 61,017 थी। यानी एक साल में डायबिटीज के मरीजों की पहचान दोगुने से ज्यादा बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे जांच अभियान का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में 30,45,750 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी। वहीं, 2025-26 में 40,07,710 लोगों की जांच हुई। इस तरह एक साल में करीब 31 प्रतिशत अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
जांच में 3.63 प्रतिशत लोग मिले डायबिटीज से पीड़ित
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जांच कराने वाले करीब दो प्रतिशत लोगों में डायबिटीज पाई गई थी। वहीं, 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 3.63 प्रतिशत हो गया।
हालांकि, ये आंकड़े केवल सरकारी जांच अभियान में शामिल लोगों के हैं। इन्हें पूरे झारखंड में डायबिटीज के मरीजों की वास्तविक संख्या नहीं माना जा सकता।
झारखंड में प्री-डायबिटीज के मामले भी चिंता का विषय
द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, झारखंड में डायबिटीज की व्यापकता करीब 7.2 प्रतिशत और प्री-डायबिटीज की व्यापकता 9.5 प्रतिशत आंकी गई थी।
प्री-डायबिटीज में व्यक्ति के खून में शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक होती है। हालांकि, यह डायबिटीज के स्तर तक नहीं पहुंचती। समय पर ध्यान नहीं देने से आगे चलकर डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज की सुविधा
एनसीडी कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर डॉ. लाल माझी के अनुसार, राज्य में डायबिटीज की जांच बढ़ने से मरीजों की पहचान समय पर हो रही है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को नियमित रूप से मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि नियमित दवा और इलाज से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की जांच पर जोर दिया जा रहा है।
डायबिटीज से बचाव के लिए नियमित जांच जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए नियमित जांच और सही समय पर इलाज जरूरी है। संतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
राज्य में जांच अभियान के जरिए अधिक मरीजों की पहचान हो रही है। ऐसे में मरीजों को नियमित इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।




