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रामगढ़: झारखंड के कुख्यात अपराधी और श्रीवास्तव गैंग के सरगना अमन श्रीवास्तव के आतंक पर कानून का शिकंजा कस गया है। पतरातू के बहुचर्चित कामेश्वर पांडे हत्याकांड में रामगढ़ की जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे-1) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अमन श्रीवास्तव और उसके करीबी सहयोगी लखन साव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
वर्चस्व की सनक ने ली थी बेगुनाह की जान
यह मामला न केवल एक हत्या का था, बल्कि क्षेत्र में दहशत फैलाने की एक सोची-समझी साजिश थी। 15 मई को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विशाल श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को समाज के लिए खतरा माना। ज्ञात हो कि पतरातू सब्जी बाजार में 70 वर्षीय वृद्ध कामेश्वर पांडे की निर्मम हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई थी ताकि अपराधी क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर सकें और लोगों के मन में खौफ पैदा कर सकें। मृतक का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई वास्ता नहीं था।
अदालत का कड़ा फैसला और जुर्माना
अदालत ने दोषियों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई:
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धारा 302 (हत्या): आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना।
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धारा 120 (बी) (साजिश): आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना।
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आर्म्स एक्ट (धारा 27): 7 साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माना।
जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अदालती कार्यवाही और गवाही
इस केस की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस की रिपोर्ट और पेश किए गए गवाहों ने अमन श्रीवास्तव के खिलाफ ठोस आधार तैयार किया। 7 मई को ही कोर्ट ने उसे दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद आज सजा के बिंदुओं पर फैसला सुनाया गया। वर्तमान में रांची की होटवार जेल में बंद अमन श्रीवास्तव के लिए यह फैसला एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। पवन किशोर पांडे द्वारा दर्ज कराई गई इस प्राथमिकी ने अंततः अपराधी को उसके अंजाम तक पहुँचाया। पुलिस प्रशासन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे अपराध के विरुद्ध एक बड़ी जीत बताया है।

