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भुईयांडीह विवाद भड़का: एनसीपी ने थाना प्रभारी पर कानूनी कार्रवाई की मांग की

Jamshedpur News: सीतारामडेरा थाना क्षेत्र भुईयांडीह में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य के नाम पर की जा रही अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध तेज़ होता जा रहा है। शनिवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय महासचिव (नगर निकाय) डॉ. पवन पांडेय ने

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Jamshedpur News:   सीतारामडेरा थाना क्षेत्र भुईयांडीह में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य के नाम पर की जा रही अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध तेज़ होता जा रहा है। शनिवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय महासचिव (नगर निकाय) डॉ. पवन पांडेय ने इस अभियान को अमानवीय बताते हुए कहा कि ठंड के मौसम में बिना पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीब परिवारों के घरों को तोड़ा जाना मानवीय मूल्यों के खिलाफ है।

डॉ. पांडेय ने सवाल उठाया कि प्रशासन अगर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर ही रहा है, तो पहले यह क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया कि अतिक्रमण की स्थिति पैदा ही न होने पाए? उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर बस्ती बसने और घरों के निर्माण के पीछे स्थानीय पुलिस-प्रशासन की मौन सहमति होती है। ऐसे में केवल गरीबों को ही दोषी ठहराना और उन्हें सजा देना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि—
“अगर किसी क्षेत्र में अतिक्रमण होता है, तो इसकी ज़िम्मेदारी भी स्थानीय थाना प्रभारी और संबंधित अधिकारियों की होनी चाहिए। जब अतिक्रमण हो रहा था तब रोक क्यों नहीं? गरीबों की ज़िंदगीभर की कमाई लगे घरों को एक झटके में तोड़ देना कहाँ का न्याय है?”

एनसीपी नेता ने यह भी कहा कि जब कार्रवाई का निर्देश ऊपर से आता है, तो प्रशासन गरीबों को ही निशाना बनाता है, जबकि वास्तविक रूप से शोषण करने वाले सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने मांग की कि जब यह बस्तियां बस रही थीं, उस समय के तत्कालीन थाना प्रभारी पर कानूनी कार्रवाई हो और उनसे ही इस नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था कानून में शामिल की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में अवैध निर्माण को रोका जा सके और विकास के नाम पर मानवाधिकारों का हनन बंद हो।

डॉ. पांडेय ने स्थानीय प्रशासन और टाटा स्टील को तुरंत प्रभाव से पुनर्वास और राहत की व्यवस्था करने की अपील की, ताकि पीड़ित परिवारों को ठंड के मौसम में खुले आसमान तले रातें न गुजारनी पड़ें। उन्होंने कहा कि ये सभी परिवार भारत के नागरिक हैं, उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार हो।

उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि पीड़ितों को जल्द राहत नहीं मिली, तो एनसीपी इसके खिलाफ व्यापक जन आंदोलन शुरू करेगी और पीड़ितों के हर कानूनी-लोकतांत्रिक संघर्ष में साथ खड़ी रहेगी।

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे वर्षों से यहां रह रहे थे, बिजली-पानी के कनेक्शन तक आवंटित थे, ऐसे में अचानक कार्रवाई उनके जीवन को संकट में डाल रही है।

फिलहाल, विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से राहत की अपील कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।

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