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Ranchi News: झारखंड के प्रतिष्ठित सिविल सेवक, प्रखर चिंतक और समाजसेवी बेंजामिन लकड़ा का 4 अक्टूबर 2025 को रांची के सेंटीविटा अस्पताल में निधन हो गया। 73 वर्ष की आयु में निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर आर्चबिशप हाउस लाया गया, जहां महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद द्वारा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक योगदान
24 जुलाई 1952 को सिमडेगा जिले के झरईन गाँव में जन्मे बेंजामिन लकड़ा ने भारतीय रिजर्व बैंक से करियर की शुरुआत की और 1982 में सिविल सेवा में शामिल होकर झारखंड के प्रथम महालेखाकार बने। उन्होंने जिले की वित्तीय ईमानदारी को मजबूत करते हुए राज्य की आर्थिक प्रणाली को व्यवस्थित किया। 2009 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
आदिवासी सशक्तिकरण की राह में अग्रणी
बेंजामिन लकड़ा ने आदिवासी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए बेंजामिन लकड़ा फाउंडेशन की स्थापना की। यह फाउंडेशन आदिवासी युवाओं को विकास के अवसर प्रदान करता है। वे एक प्रतिभाशाली लेखक और विचारक भी थे, जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए प्रेरणा भरा योगदान दिया।
परिवार और अंतिम संस्कार की जानकारी
लकड़ा अपनी पत्नी, पुत्र, दो पुत्रियों और दो नाती-पोतों को छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार 5 अक्टूबर को उनके पैतृक गाँव झरईन में किया जाएगा। उनकी स्मृति उनके प्रशासनिक कार्यों और समाज सेवा के माध्यम से सदैव जिंदा रहेगी।
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