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झारखंड में ‘शीशमहल’ पर संग्राम : 100 करोड़ के CM आवास पर भाजपा का तीखा हमला

रांची: झारखंड की सियासत में ‘आलीशान महल’ को लेकर एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर करारा हमला बोला। भाजपा का आरोप

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रांची: झारखंड की सियासत में ‘आलीशान महल’ को लेकर एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर करारा हमला बोला। भाजपा का आरोप है कि जो सरकार खुद को “जल-जंगल-जमीन” और “गरीब-आदिवासी” की हितैषी बताती है, वह चुपचाप मुख्यमंत्री के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य ‘शीशमहल’ तैयार करवा रही है।

स्विस जकूजी और ढाई करोड़ का गार्डन : विलासिता के आरोप

भाजपा कार्यालय में आयोजित इस प्रेस वार्ता में प्रतुल शाहदेव ने आंकड़ों और सुविधाओं की एक लंबी सूची पेश की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। शाहदेव ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नक्शेकदम पर चल रहे हैं।

प्रवक्ता के अनुसार, इस नए आवास में स्विमिंग पूल, अत्याधुनिक जकूजी, आलीशान सुइट्स, 2 करोड़ रुपये का भव्य फव्वारा और लगभग 2.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला एक विशेष गार्डन शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस राज्य का आम आदिवासी और मूलवासी आज भी बुनियादी स्वास्थ्य, शिक्षा और दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है, वहां के मुखिया को इतनी विलासिता की क्या आवश्यकता है?

कैबिनेट की ‘गोपनीय’ मंजूरी पर उठे सवाल

भाजपा ने इस परियोजना की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शाहदेव ने दावा किया कि इस ‘शीशमहल’ के निर्माण को हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में हरी झंडी दे दी गई थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इस जानकारी को प्रेस और जनता से छिपाकर रखा गया।

लागत का खेल : 47 करोड़ से 100 करोड़ तक का सफर

प्रतुल शाहदेव ने बजट का विश्लेषण करते हुए बताया कि आधिकारिक तौर पर मुख्य भवन के लिए लगभग 47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि, जब इसमें साज-सज्जा, सुरक्षा उपकरण, लैंडस्केपिंग और अन्य सहायक खर्चों को जोड़ा जाता है, तो यह आंकड़ा 70 करोड़ के पार चला जाता है। उन्होंने सरकारी निर्माणों में होने वाली सामान्य लागत वृद्धि (25-30%) का हवाला देते हुए कहा कि अंततः यह परियोजना 100 करोड़ रुपये से भी अधिक की बोझ जनता की जेब पर डालेगी।

स्मार्ट सिटी का तर्क और भाजपा की चेतावनी

भाजपा प्रवक्ता ने एक तार्किक सवाल पूछते हुए कहा कि जब सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि भविष्य में स्मार्ट सिटी क्षेत्र में नया राजभवन और मुख्यमंत्री आवास बनाया जाएगा, तो वर्तमान स्थान पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने का क्या औचित्य है? उन्होंने इसे “शाही ठाठ-बाट” की भूख करार दिया।

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा इस मुद्दे को केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी इस “शीशमहल स्कैम” को लेकर जनता के बीच जाएगी और उनसे पूछेगी कि क्या उनका टैक्स का पैसा विकास के लिए है या मुख्यमंत्री के ऐशो-आराम के लिए। इस दौरान भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।

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