Gumla : संसद के आगामी मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा बिल आने की चर्चा के बीच पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधु तिर्की शुक्रवार को चैनपुर पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के साथ बैठक की। बैठक में जिला परिषद सदस्य मैरी लकड़ा, प्रखंड अध्यक्ष प्रमोद खलखो, सांसद प्रतिनिधि अल्बर्ट तिग्गा, प्रेम बड़ा समेत कई स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक के दौरान बंधु तिर्की ने परिसीमन के संभावित असर को लेकर लोगों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड में आदिवासी और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में अभी से लोगों को अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होने की जरूरत है।
पुराने परिसीमन का जिक्र कर जताई चिंता
मीडिया से बातचीत में बंधु तिर्की ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में परिसीमन बिल आने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में परिसीमन का मुद्दा सिर्फ सीटों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनके अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने पुराने परिसीमन के प्रयास का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या 28 से घटकर 22 होने की आशंका बनी थी। तब गुरुजी शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड के नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी। इसके बाद परिसीमन पर रोक लगी थी।
बंधु तिर्की ने कहा कि आज फिर वही चिंता सामने खड़ी है। अगर जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण होता है तो झारखंड में आदिवासी और दलित समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे को लेकर सभी लोगों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी होगी।
जल, जंगल, जमीन और पहचान से जुड़ा है झारखंड
बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड का गठन जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासियों की पहचान और अधिकारों को ध्यान में रखकर हुआ है। ऐसे में राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आदिवासी और दलित समुदाय के राजनीतिक अधिकार कमजोर न हों।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में आदिवासियों और दलितों की आरक्षित सीटें कम नहीं होनी चाहिए। जरूरत इस बात की है कि उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाए और उनकी सीटों में बढ़ोतरी हो।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों को लेकर वह लगातार गांवों में जाकर लोगों से बातचीत कर रहे हैं। उनका उद्देश्य लोगों को परिसीमन के संभावित असर के बारे में जानकारी देना और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के लिए तैयार करना है।
30 अगस्त को मोराबादी मैदान में जुटने की अपील
बंधु तिर्की ने बताया कि इसी अभियान के तहत आगामी 30 अगस्त को रांची के ऐतिहासिक मोराबादी मैदान में विशाल रैली और महाजुटान का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने चैनपुर के ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मोराबादी मैदान से आदिवासियों के हक और अधिकार की आवाज मजबूती से उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं है, बल्कि अपने अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।
बैठक में मौजूद ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी 30 अगस्त के कार्यक्रम में शामिल होने और इसे सफल बनाने का संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि आदिवासी और दलित समुदाय के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर वे एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगे।
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