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झारखंड पुलिस पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, कहा—“नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर काम कर रही है सरकार और पुलिस”

Ranchi : झारखंड में कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के कामकाज पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर झारखंड पुलिस मुख्यालय और डीजीपी कार्यालय पर सीधा हमला

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Ranchi : झारखंड में कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के कामकाज पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर झारखंड पुलिस मुख्यालय और डीजीपी कार्यालय पर सीधा हमला बोला।

मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि राजधानी रांची में एसएसपी, डीआईजी और आईजी जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी मौजूद हैं, लेकिन जब गोंदा और नामकुम थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले आवेदिका खुशी तिवारी के अभ्यावेदन की जांच की समीक्षा करने की बात आई, तो यह जिम्मेदारी “डीआईजी (बजट)” को सौंप दी गई। उन्होंने इस निर्णय को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि “क्या झारखंड पुलिस के उच्च अधिकारी इतने अक्षम हैं कि डीजीपी को बजट संभालने वाले अधिकारी से आपराधिक मामले की जांच करानी पड़ रही है?”

मरांडी ने इसे पुलिस प्रशासन की “पूर्ण विफलता” और “नियमों के खुले उल्लंघन” का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि डीजीपी की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है मानो पुलिस विभाग में किसी तरह की अनुशासनात्मक या प्रशासनिक प्रणाली शेष नहीं रह गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि एक ओर राज्य सरकार आईआरबी और जैप बटालियन की महिला आरक्षियों को उनके विशेष प्रशिक्षण के विपरीत थानों में मुंशी (क्लर्क) का काम सौंप रही है, जिससे 15 प्रतिशत से अधिक बल अनआर्म्ड ड्यूटी में लगाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, संवेदनशील मामलों की जांच ऐसे अधिकारियों को दी जा रही है जिनका अपराध जांच या फील्ड प्रशासन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

मरांडी ने तंज कसते हुए कहा, “अगर रांची के एसएसपी, डीआईजी और आईजी इतने ही नाकारा हैं कि वे बुनियादी जांच का काम नहीं कर सकते, तो उन्हें पद से हटा देना चाहिए।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब झारखंड पुलिस अपराध नियंत्रण छोड़कर हिसाब-किताब करने में लग जाएगी, ताकि जब केंद्र सरकार को ड्यूटी के लिए बल चाहिए हो तो राज्य सरकार ‘बल की कमी’ का बहाना बना सके?

अंत में मरांडी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “झारखंड पुलिस में सब कुछ बिना नियम-कानून के चल रहा है। संवैधानिक मर्यादाओं और अखिल भारतीय पुलिस सेवा के नियमों की अनदेखी करते हुए एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी वर्दी पहनकर डीजीपी का पद संभाले हुए हैं, जो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।”

उनकी यह टिप्पणी राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के प्रति तीखे असंतोष का संकेत देती है।

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