Azamgarh: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में घटी एक दिल दहला देने वाली वारदात ने समाज में पसरे अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और मानसिक भ्रम के खतरनाक परिणामों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। गांव में पिछले चार दिनों से कथित रूप से भूत भगाने और प्रेत आत्मा की शांति के लिए चल रहे गुप्त अनुष्ठान के दौरान अचानक गृहस्वामी अरविंद सिंह ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर अपनी पत्नी, अपने नाबालिग बेटे और पूजा करा रहे दो पंडितों को मौत के घाट उतार दिया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मुख्य हत्यारोपी अरविंद सिंह भी मारा गया। इस सामूहिक हत्याकांड ने वर्ष 2018 के बहुचर्चित दिल्ली के ‘बुराड़ी कांड’ की खौफनाक यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
4 दिन से चल रहा था अनुष्ठान

ग्रामीणों और पड़ोसियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब आठ वर्ष पूर्व अरविंद के सगे भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हो गई थी। इसके बाद से ही अरविंद का परिवार लगातार घरेलू कलह और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। अरविंद के मन में यह गहरा वहम बैठ गया था कि उसके भाई की हत्या के पीछे उसकी ही पत्नी का हाथ था और भाई की अशांत आत्मा परिवार को बर्बाद कर रही है। प्रेत बाधा से मुक्ति और आत्मा की शांति के लिए घर में दो पुरोहितों को बुलाकर पिछले चार दिनों से महामृत्युंजय मंत्र का सघन जाप और नारायण बलि अनुष्ठान कराया जा रहा था। इसी तंत्र-साधना के दौरान मंगलवार को अरविंद का मानसिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और उसने खूनी खेल को अंजाम दे दिया।
बुराड़ी कांड की यादें ताजा
यह सनसनीखेज वारदात सीधे तौर पर वर्ष 2018 के दिल्ली के बुराड़ी कांड की याद दिलाती है, जहां एक ही परिवार के 11 सदस्यों ने साझा अंधविश्वास (Shared Delusion) और मोक्ष की अंधी चाह में फांसी का फंदा लगा लिया था। ठीक इसी तरह वर्ष 2023 में वाराणसी के एक परिवार के चार सदस्यों ने भी तंत्र-पूजा और मोक्ष की भ्रामक मान्यताओं के चलते सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। आजमगढ़ की घटना ने साफ कर दिया है कि जब मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और भय को अंधविश्वास का सहारा मिल जाता है, तो विवेक पूरी तरह समाप्त हो जाता है और पूरा परिवार काल के गाल में समा जाता है।
आस्था और अंधविश्वास में अंतर
धार्मिक और ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि सनातन वैदिक परंपराओं में अकाल मृत्यु के उपरांत आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, श्रीमद्भागवत कथा और तर्पण जैसी विशुद्ध सात्विक प्रक्रियाओं का विधान है। तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी को प्रताड़ित करना या जानलेवा अनुष्ठान करना धर्म नहीं, बल्कि घोर पाखंड और अपराध है। अक्सर संकटग्रस्त लोग समस्याओं के त्वरित समाधान के लालच में ऐसे नीम-हकीमों और तांत्रिकों के चंगुल में फंस जाते हैं, जो उनके डर का फायदा उठाकर उनकी मानसिक स्थिति को और ज्यादा हिंसक बना देते हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच जारी है, जिसके बाद ही घटना के सभी कानूनी व मनोवैज्ञानिक पहलू पूरी तरह सामने आ सकेंगे।




