U.P. News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव आजम खान जेल से रिहा होने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। करीब पांच साल का लंबा समय जेल में बिताने के बाद जब वे बाहर आए तो उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर बात की।

मुलायम सिंह यादव का जिक्र, खुदगर्जी की स्वीकारोक्ति

आजम खान ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए थी। लेकिन मैंने खुदगर्ज होकर राजनीति में बने रहने का फैसला लिया। उनकी मानें तो वजह यह थी कि रामपुर के लोगों के दर्द और अधूरे कामों ने उन्हें राजनीति में रहने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, “इन अधूरे कामों को पूरा करने की खुदगर्जी में मैंने बहुत जिल्लत झेली है। अब जब सिर ओखली में दे दिया है, तो मूसल से क्या डरना।”

रामपुर के इतिहास पर कटाक्ष

आजम खान ने अपने बयान में रामपुर के इतिहास को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि वे नवाबों से लड़कर यहां तक पहुंचे हैं। उनका तंज था कि नवाबों की गद्दारी के कारण ही देश की आजादी 1947 तक टल गई। 1857 की क्रांति में मेरठ से चले सेनानी जीतते-जीतते रामपुर तक पहुंचे, लेकिन रामपुर के नवाबों की सेना ने उन्हें रोक दिया।

बसपा में जाने की अटकलों पर विराम

जेल से बाहर आने के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या वे समाजवादी पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी का रुख करेंगे तो उन्होंने सख्ती से इन कयासों को खारिज कर दिया। आजम ने साफ किया कि यह सिर्फ बचपने की बातें हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कभी सपा नहीं छोड़ी थी, बल्कि मुलायम सिंह यादव ने मजबूरी में मुझे बाहर किया था। बाद में मोहब्बत से उन्होंने मुझे वापस बुलाया। उनका और मेरा रिश्ता अलग ही था।”

रामपुर की राजनीति फिर गरम

आजम खान जब सपा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे, तब रामपुर सत्ता का केंद्र जैसा बन गया था। मुस्लिम वोट बैंक और अपनी बेबाकी के चलते वे हमेशा चर्चा के केंद्र में रहे। अब जेल से आजाद होकर लौटने के बाद, एक बार फिर रामपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सियासी हल्कों में उनके अगले कदम पर नजरें टिकी हैं।

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