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झारखंड में 4 अगस्त को विधानसभा घेराव! जानें किन मुद्दों को लेकर भड़का गुस्सा

Ranchi News : झारखंड में 4 अगस्त 2025 को झारखंड विधानसभा घेराव की बड़ी घोषणा की गई है। यह ऐलान आमया संगठन द्वारा बुढ़मू प्रखंड के रोल में आयोजित राउंड टेबल मीटिंग के दौरान किया गया। बैठक की अध्यक्षता संगठन के जिला उपाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार

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Ranchi News : झारखंड में 4 अगस्त 2025 को झारखंड विधानसभा घेराव की बड़ी घोषणा की गई है। यह ऐलान आमया संगठन द्वारा बुढ़मू प्रखंड के रोल में आयोजित राउंड टेबल मीटिंग के दौरान किया गया। बैठक की अध्यक्षता संगठन के जिला उपाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने की, जबकि संचालन फिरोज अंसारी ने किया।

बैठक में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एस. अली ने कहा झारखंड अलग राज्य बने 25 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब भी स्थानीय नीति नहीं बन पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्गों को आबादी के अनुपात में आरक्षण, मुस्लिम समुदाय के 14.5% लोगों को न्याय, संवैधानिक अधिकार, रोजगार और शैक्षणिक विकास जैसे मुद्दों की अब भी अनदेखी हो रही है।

एस. अली ने कहा राज्य में आज भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं थम नहीं रही हैं और इस पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी कानून लागू नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड के हज यात्रियों को रांची से सीधी फ्लाइट न देकर कोलकाता भेजा जा रहा है, जो भेदभाव का प्रतीक है।

मदरसा शिक्षा और उर्दू भाषा को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना था कि उर्दू एकेडमी के गठन की फाइल वर्षों से लंबित है। वहीं मुख्यमंत्री निशुल्क अल्पसंख्यक कोचिंग योजना भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि अल्पसंख्यक युवाओं के लिए ऋण योजनाओं का बजट नाममात्र का है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार से स्थानांतरित उर्दू शिक्षक पदों को बहाल करने के बजाय सरेंडर कर दिया गया है। साथ ही आलिम और फाजिल डिग्री की मान्यता समाप्त की जा रही है, जिससे मदरसा शिक्षा को गहरा झटका लग रहा है।

एस. अली ने इस आंदोलन को न्याय और संवैधानिक अधिकारों की बहाली की लड़ाई बताया और कहा कि सभी वंचित वर्गों को एकजुट होकर विधानसभा घेराव में शामिल होना चाहिए।

बैठक में मुश्ताक अंसारी, नदीम शान, शब्बीर, सउद, दिलदार, इस्तियाक, खुर्शीद, पप्पू, अमीरूल, रशीद, क़य्यूमउद्दीन, जमील, वारिस, शमसुल, अमरूद्दीन, मजीबूल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सभी ने एक सुर में 4 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव में शामिल होने का संकल्प लिया।

आमया संगठन का यह कदम राज्य की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है और आने वाले दिनों में इसका असर झारखंड की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

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