World News: पाकिस्तान की अस्थिर सियासत में चल रही लंबी खींचतान, सौदेबाजी और सत्ता संघर्ष का अंत आखिरकार उसी दिशा में गया, जिसकी लंबे समय से आशंका थी। पीएम शहबाज शरीफ ने अंततः सेना के बढ़ते दबदबे के आगे झुकते हुए जनरल आसिम मुनीर की ‘सुपर पावर’ नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भी इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसने पाकिस्तान की सत्ता संरचना में सेना के वर्चस्व को कानूनी रूप से मजबूत कर दिया है।

सवाल यह है कि आखिर शहबाज सरकार, जो नवाज शरीफ के मार्गदर्शन में चल रही थी, मुनीर के सामने झुक कैसे गई और ऐसा क्या दांव चला गया कि मुनीर एक साथ तीन सर्वोच्च पदों पर काबिज़ हो गए।

मुनीर अब एक साथ COAS, CDF और फील्ड मार्शल

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर न केवल पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) बने रहेंगे, बल्कि वे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) भी बन गए हैं। इस तरह पाकिस्तान की तीनों सेनाओं—थल, जल और वायु सेना—की कमान अब एक ही अधिकारी के हाथों में होगी। यह नियुक्ति पाकिस्तान के संविधान में किए गए 27वें संशोधन के बाद संभव हुई है, जिसने सेना प्रमुख के अधिकारों को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है।

कई हफ्तों की सौदेबाजी का नतीजा

इस संवेदनशील फाइल पर हस्ताक्षर में हुई देरी महज़ तकनीकी नहीं थी, बल्कि इस्लामाबाद के सत्ता गलियारों में यह हफ्तों चली गहन राजनीतिक खींचतान का नतीजा थी।

सूत्रों के अनुसार, यह देरी शहबाज सरकार, पार्टी प्रमुख नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच चले गहन ‘गिव एंड टेक’ (सौदेबाजी) पर चली बातचीत का परिणाम थी। पीएमएल-एन नेतृत्व, विशेषकर नवाज शरीफ, इस अत्यधिक पावरफुल नियुक्ति के बदले में अपनी राजनीतिक सुरक्षा और भविष्य में सत्ता में वापसी का स्पष्ट आश्वासन चाहते थे।

एक वरिष्ठ पीएमएल-एन सूत्र के अनुसार, नवाज, जो चौथी बार पीएम बनने के अपने सपने को पूरा होते देखना चाहते हैं, उन्होंने शर्त रखी थी कि यदि मुनीर अगले पांच साल CDF और COAS बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करनी होगी।

सरकार के पास नहीं था कोई विकल्प

सूत्रों का कहना है कि नवाज ने भविष्य की सेना नियुक्तियों में भी अपनी राय को महत्व दिए जाने की शर्त रखी थी। अंततः, शहबाज सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह निर्णय या तो यह दर्शाता है कि सेना ने सभी राजनीतिक आश्वासन दे दिए हैं, या सरकार के पास इन शर्तों को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, राष्ट्रपति ज़रदारी द्वारा एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के कार्यकाल में दो साल का विस्तार मंजूर करना, आसिम मुनीर द्वारा सभी बलों को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर के हाथों में COAS, CDF और फील्ड मार्शल जैसे रैंक का एक साथ आना पाकिस्तान में सत्ता के अभूतपूर्व केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। शहबाज सरकार द्वारा मुनीर को यह सुपर पावर देना इस बात की खुली स्वीकारोक्ति है कि पाकिस्तान में असली ‘किंगमेकर’ कौन है। नवाज शरीफ को सत्ता में वापसी के लिए जिस तरह सेना के सामने झुकना पड़ा, उसने एक बार फिर पाकिस्तान की असैन्य सरकार की मजबूरी को उजागर कर दिया है।

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