बीडीओ यादव बैठा की नाराजगी, कार्रवाई के संकेत

चैनपुर (गुमला): चैनपुर प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत शुक्रवार को उस समय सामने आ गई, जब प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा के औचक निरीक्षण में डहुड़गांव स्थित आरोग्य मंदिर पूरी तरह बंद मिला। न तो केंद्र पर कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था और न ही बंद रहने की कोई सूचना या नोटिस चस्पा था। इस गंभीर लापरवाही को लेकर बीडीओ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आरोग्य मंदिर जैसे आवश्यक स्वास्थ्य केंद्र को बंद रखने की अनुमति किसने दी?
और जब केंद्र बंद था, तब सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) व अन्य कर्मी कहां थे?

निरीक्षण के दौरान बीडीओ ने पाया कि आरोग्य मंदिर में नियमित उपस्थिति, समय पालन और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार इलाज और जरूरी दवाओं के लिए आने पर उन्हें बंद केंद्र देखकर वापस लौटना पड़ता है।

बीड़ीओ यादव बैठा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब करने और अनुपस्थित कर्मियों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग पर सवाल

आरोग्य मंदिर बंद रहने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई?

सीएचओ की भूमिका और उपस्थिति की नियमित मॉनिटरिंग क्यों नहीं हो रही?

क्या ग्रामीणों के स्वास्थ्य से इस तरह खिलवाड़ करना उचित है?

सीएचओ का पक्ष

आरोग्य मंदिर बंद मिलने के मामले में जब संबंधित सीएचओ से संपर्क किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि

> “आज पूरे चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के सभी सीएचओ कुर्मी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित सामूहिक क्रिसमस गैदरिंग कार्यक्रम में शामिल थे। इसी कारण प्रखंड क्षेत्र के सभी आरोग्य मंदिर अस्थायी रूप से बंद रहे।”

सीएचओ ने यह भी बताया कि यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित था और सभी सीएचओ को उसमें भाग लेने का निर्देश मिला था।

लेकिन सवाल बरकरार

हालांकि सीएचओ की इस दलील के बाद भी कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—

यदि सामूहिक कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था, तो आरोग्य मंदिरों में सूचना पट्ट या नोटिस क्यों नहीं लगाया गया?

क्या स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद करना नियमसम्मत है, जबकि ग्रामीण इलाज के लिए उन पर निर्भर रहते हैं?

आपात स्थिति में मरीजों की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

क्या इस संबंध में बीडीओ या जिला प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई थी?

ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी सूचना के आरोग्य मंदिर बंद रहने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज इलाज और दवाओं के लिए भटकते रहे।

अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को कैसे लेता है—
क्या इसे एक सामान्य कार्यक्रम मानकर नजरअंदाज किया जाएगा या फिर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही मानते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

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