रांची: झारखंड की राजधानी रांची की एक विशेष अदालत ने रंगदारी (extortion) और जानलेवा हमले के गंभीर मामले में तीन आरोपियों को तगड़ा झटका दिया है। रंगदारी की मांग को लेकर एक बस चालक पर सरेआम फायरिंग करने के मामले में नामजद तीन आरोपियों को अदालत से किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है। अपर न्यायायुक्त (Additional Judicial Commissioner) की अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए तीनों आरोपियों नीतीश पाण्डेय, गोलू बाल्मीकि और अभिजीत कुमार की जमानत याचिका (Bail Plea) को सिरे से खारिज कर दिया है। 

क्या है पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात करीब दो महीने पहले 12 मई की रात को घटित हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड और दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, घटना वाले दिन ‘जीवन ज्योति’ नाम की एक यात्री बस रांची के अरगोड़ा चौक स्थित यात्री शेड के पास खड़ी थी। शहर में नो-एंट्री लागू होने के कारण बस चालक गाड़ी को वहीं रोककर नो-एंट्री समय बीतने का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान रात के करीब 10 बजे, जब सड़क पर आवाजाही कम हो चुकी थी, दो नकाबपोश अपराधी अचानक बस के भीतर घुस गए।

बस में दाखिल होते ही दोनों आरोपियों ने सीधे चालक को अपना निशाना बनाया। अपराधियों ने चालक के सिर पर लोडेड रिवॉल्वर सटा दी और गाली-गलौज करते हुए मोटी रकम की मांग करने लगे। चालक कुछ समझ पाता, इससे पहले ही दोनों आरोपी उसकी जेब में हाथ डालकर जबरन पैसे निकालने लगे। जब बस चालक ने अपराधियों की इस हरकत का कड़ा विरोध किया और अपनी मेहनत की कमाई देने से मना कर दिया, तो बौखलाए अपराधियों ने सीधे चालक के सिर को निशाना बनाकर गोली चला दी।

सूझबूझ से बची जान, मौके से दबोचा गया एक आरोपी

अपराधियों ने चालक को मारने की नीयत से ही ट्रिगर दबाया था, लेकिन चालक की त्वरित सूझबूझ और किस्मत ने उसकी जान बचा ली। गोली चलने के ठीक उसी पल चालक ने तेजी से अपना सिर नीचे की तरफ झुका लिया। इस वजह से अपराधियों की गोली चालक के सिर के ऊपर से निकल गई और वह बाल-बाल बच गया।

सरेराह बस के भीतर गोली चलने की आवाज से अरगोड़ा चौक के आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। इसी बीच, गश्त कर रही पुलिस की टीम को जैसे ही फायरिंग की भनक लगी, वे तुरंत मौके की तरफ दौड़े। पुलिस को अपनी तरफ आते देख बस के अंदर मौजूद अपराधी घबरा गए और भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए भाग रहे अपराधियों का पीछा किया और घेराबंदी करके एक आरोपी को वारदात के तुरंत बाद मौके से ही दबोच लिया। हालांकि, अंधेरे और हड़बड़ी का फायदा उठाकर उसके दो अन्य साथी वहां से फरार होने में कामयाब रहे।

पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट का फैसला

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पीड़ित बस चालक के लिखित बयान के आधार पर रांची के अरगोड़ा थाने में आरोपियों के खिलाफ रंगदारी, आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। मौके से गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने बाद में फरार चल रहे दोनों अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मामले की नियमित सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट के सामने जमानत की गुहार लगाई थी। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। लेकिन सरकारी वकील ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि यह सरेआम रंगदारी और हत्या के प्रयास का बेहद गंभीर मामला है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून की परवाह किए बिना आम नागरिकों पर गोलियां चला रहे हैं। अगर ऐसे अपराधियों को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और गवाहों को डराए-धमकाए जाने का खतरा भी बढ़ जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपराध की प्रकृति को गंभीर माना और नीतीश पाण्डेय, गोलू बाल्मीकि व अभिजीत कुमार की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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