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खंडहर में तब्दील हुआ कुरुमगढ़ का आंगनबाड़ी केंद्र, बच्चों की सुरक्षा पर संकट

चैनपुर क्षेत्र का आंगनबाड़ी केंद्र अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। न छत ढंग की है, न बैठने की व्यवस्था। खिड़कियां टूटी हुई हैं, दिन हो या रात, इन्हें बंद करना संभव नहीं। दरवाजे का तो नामोनिशान तक नहीं है। छत जगह-जगह से ढकी

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चैनपुर क्षेत्र का आंगनबाड़ी केंद्र अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। न छत ढंग की है, न बैठने की व्यवस्था। खिड़कियां टूटी हुई हैं, दिन हो या रात, इन्हें बंद करना संभव नहीं। दरवाजे का तो नामोनिशान तक नहीं है। छत जगह-जगह से ढकी और टूटकर गिर रही है। हालात इतने खराब हैं कि आंगनबाड़ी सेविकाएं भी अंदर जाने से डरती हैं कि कहीं मलबा गिरकर उन्हें चोट न पहुँचा दे।

कभी इस भवन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, लेकिन अब यह पूरी तरह जर्जर होकर खंडहर का रूप ले चुका है। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि मरम्मत या नया भवन निर्माण की कोई पहल अब तक नहीं की गई है।

स्थिति सिर्फ कुरुमगढ़ तक सीमित नहीं है। पूरे प्रखंड क्षेत्र की कई आंगनबाड़ियां भाड़े के मकानों में संचालित हो रही हैं। हालत यह है कि प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय तक जर्जर भवन में चल रहा है। वहीं, मुख्यालय की आंगनबाड़ियां भी भाड़े के मकानों में संचालित हो रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हालात में वे बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने से कतराने लगे हैं। कहीं कोई अनहोनी न हो जाए, यही डर उन्हें रोकता है। बावजूद इसके विभाग अब तक गहरी नींद में सोया हुआ है

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