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Ranchi : पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान की लंबित राशि को लेकर आजसू छात्र संघ ने गुरुवार को राजधानी रांची में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। “शिक्षा के लिए भिक्षा—जनाक्रोश मार्च” नामक इस अभियान में हजारों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।
बापू वाटिका, मोराबादी से शुरू हुआ यह विशाल मार्च जैसे ही राजभवन की ओर बढ़ा, पुलिस ने मछलीघर के पास रोकते हुए भीड़ को कांके रोड की ओर डायवर्ट कर दिया। इसके बावजूद छात्र रातु रोड के रास्ते राजभवन पहुंचने का प्रयास करते रहे। फ्लाईओवर के पास पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद आजसू के कई नेता और छात्र वहीं सड़क पर बैठ गए और हेमंत सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आजसू छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल को राजभवन बुलाकर ज्ञापन स्वीकार किया। राज्यपाल की अनुपस्थिति में ज्ञापन राजभवन सचिवालय को सौंपा गया। मार्च में रांची, लोहरदगा, गुमला, हज़ारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और अन्य जिलों के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों ने भाग लिया। छात्रों की मुख्य मांग 2024–25 की लंबित छात्रवृत्ति का तत्काल भुगतान तथा e-Kalyan पोर्टल पर लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करना था।
मार्च का नेतृत्व आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, महासचिव विशाल महतो, युवा आजसू के महानगर अध्यक्ष अमित यादव सहित कई वरीय नेताओं ने किया। वरिष्ठ नेता संजय मेहता भी इस दौरान मौजूद रहे।
प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि यह आंदोलन किसी पार्टी का नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज़ है जो न्याय और समान अवसर की मांग कर रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने चेतावनी दी कि जब तक हर छात्र को उसकी छात्रवृत्ति नहीं मिलती, आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने कहा कि छात्रवृत्ति दया नहीं, अधिकार है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।
इधर, केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों की पीड़ा को सुनने को तैयार नहीं है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की छात्रवृत्ति अटकाकर सरकार युवा पीढ़ी को शिक्षा से दूर कर रही है, जबकि बड़े आयोजनों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आजसू छात्र संघ ने चेताया कि यदि तुरंत समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

