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रमजान के बाद सेना बलूच लोगों का करना चाहती है कत्लेआम!

World News. पाकिस्तान सेना के एक पूर्व सैनिक ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना रमजान के बाद बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में क्रूर अभियान चलाने की योजना बना रही है, जिसका मकसद पश्तून और बलोच समुदायों का सफाया करना है। उसने बताया कि पाकिस्तान

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World News. पाकिस्तान सेना के एक पूर्व सैनिक ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना रमजान के बाद बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में क्रूर अभियान चलाने की योजना बना रही है, जिसका मकसद पश्तून और बलोच समुदायों का सफाया करना है। उसने बताया कि पाकिस्तान में होने वाले मस्जिद विस्फोट और धार्मिक शख्सियतों की हत्याओं के पीछे पाकिस्तानी सेना और सरकार का हाथ है। इस खुलासे के बाद पूर्व सैनिक की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी, लेकिन उसका वीडियो कन्फेशन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

पूर्व सैनिक ने खोली पाकिस्तानी सेना की पोल, वीडियो वायरल होते ही हत्या

पूर्व सैनिक जो पाकिस्तानी सेना में लंबे समय तक सेवा में रहा, उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने अधिकारियों के आदेश पर की गई क्रूरताओं का खुलासा किया। वीडियो में बताया कि उसने अपने अधिकारियों के सीधे आदेश पर 12 निर्दोष लोगों को मार डाला, जो किसी भी अपराध में शामिल नहीं थे। उसने कहा कि वह अपने अधिकारियों का विश्वासपात्र बन गया था। इसके चलते उसका इस्तेमाल इस तरह के कामों में किया जाने लगा, लेकिन धीरे-धीरे उसे अपने ही देश के लोगों को मारने में घृणा होने लगी।

पूर्व सैनिक ने अपने कबूलनामे में बताया कि रमजान के बाद पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बड़े पैमाने पर पश्तून और बलोच समुदायों का नरसंहार करने की योजना बना रही है। उसने कहा कि इसके लिए पहले से ही योजना तैयार है और इसका मकसद इन समुदायों का जातीय सफाया करना है। उसने कहा कि इस प्लान में उसे भी शामिल किया गया, लेकिन उसकी अंतरात्मा ने उससे विद्रोह कर दिया और वह अपनी वर्दी उतारने पर मजबूर हो गया। सोशल मीडिया पर जारी अपने एक वीडियो में पूर्व सैनिक रोता हुआ नजर आ रहा है।

पूर्व सैनिक का यह वीडियो कन्फेशन जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अज्ञात हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी। माना जा रहा है कि उसकी हत्या के पीछे पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों का हाथ है, जो नहीं चाहती थी कि उनके कारनामे उजागर हों। पाकिस्तानी प्रशासन ने इस वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने की कोशिश की, लेकिन तब तक यह वायरल हो चुका था। देखने वाली बात यह है कि पूर्व सैनिक की हत्या पर न तो किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन ने आवाज उठाई है और न मानवाधिकार आयोग ने जांच की मांग की है।

 

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