अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Chaibasa News: जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत में जश्न और पिकनिक की तैयारियों में डूबी है, तब पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में एक अलग और गंभीर मुहिम चल रही है। आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा ने समाज के लोगों से अपील की है कि वे 01 और 02 जनवरी को खुशियां मनाने के बजाय अपने पुरखों के बलिदान को याद करें। मझगांव के सोनापोस पंचायत अंतर्गत बड़ा बेलमा मुखिया टोला में आयोजित एक नुक्कड़ सभा के माध्यम से यह संदेश घर-घर तक पहुँचाया गया कि यह दिन जश्न का नहीं, बल्कि मातम और आत्मचिंतन का है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज लहू: खरसावां से कलिंगानगर तक की दास्तां
नुक्कड़ सभा की अगुवाई कर रहे महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोबिंद बिरूवा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि 01 और 02 जनवरी का इतिहास आदिवासी समाज के लिए खून से लिखा गया है। उन्होंने याद दिलाया कि इन्हीं तारीखों पर खरसावां, जगन्नाथपुर, सेरेंगसिया और ओडिशा के कलिंगानगर में जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए ब्रिटिश हुकूमत और दमनकारी ताकतों के खिलाफ लड़ते हुए सैकड़ों आदिवासियों को गोली मार दी गई थी या फांसी पर चढ़ा दिया गया था। बिरूवा ने कहा, “जिस दिन हमारे पूर्वजों ने शहादत दी, उस दिन हम डीजे बजाकर और मांस-मदिरा के साथ पिकनिक कैसे मना सकते हैं?”
पिकनिक नहीं, शहीदों को दें श्रद्धांजलि; बेलमा डैम पर रोक की मांग
महासभा के वक्ताओं ने बेलमा डैम जैसे क्षेत्रों में होने वाली पिकनिक की परंपरा पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे शहीदों के सम्मान के खिलाफ बताते हुए सामाजिक रूप से रोक लगाने की बात कही। युवाओं और समाज के बड़े-बुजुर्गों से आग्रह किया गया कि वे पिकनिक मनाने के बजाय राजाबासा, जगन्नाथपुर और खरसावां स्थित शहीद स्थलों पर जाएं और वहां दीप जलाकर अपने बलिदानियों को नमन करें। महासभा का मानना है कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास के गौरव और दुख से परिचित कराना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
बड़ी संख्या में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता; बदलाव का संकल्प
इस नुक्कड़ सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड, महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। महासभा के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि 01 और 02 जनवरी को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाना ही समाज के प्रति सच्ची वफादारी है। सभा में रंजीत जेराई, अमर चातार और सिकंदर तिरिया सहित कई ग्रामीणों ने भी हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे इस बार नए साल के जश्न से दूर रहेंगे और समाज को जागरूक करेंगे।

