, रांची में ईद मिलाद-उन-नबी (जुलूस-ए-मोहम्मदी) के मौके पर एक बेहद भव्य और शांतिपूर्ण जुलूस निकाला गया।
पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस (यौम-ए-पैदाइश) के इस मुबारक मौके पर पूरे रांची शहर में अकीदत और उत्साह का माहौल देखा गया।
इस भव्य जुलूस और आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
📍 जुलूस का मार्ग और भव्यता
- मुख्य मार्ग: यह जुलूस रांची के विभिन्न इलाकों से पारंपरिक रूप से शुरू होकर कर्बला चौक पहुंचा। वहां से यह महात्मा गांधी रोड (मेन रोड) होते हुए डोरंडा स्थित रिसालदार बाबा के मजार पर जाकर संपन्न हुआ।
- आकर्षक सजावट: ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर रांची की मस्जिदों, मदरसों और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को खूबसूरत हरी लाइटों और इस्लामी परचमों (झंडों) से भव्य रूप से सजाया गया था।
- अकीदतमंदों की भीड़: जुलूस में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। लोग हाथों में शांति और भाईचारे के संदेश वाले बैनर और झंडे लिए ‘नात-ए-पाक’ (धार्मिक गीत) पढ़ते हुए आगे बढ़ रहे थे।
🤝 गंगा-जमुनी तहज़ीब और भाईचारा
- अमन की दुआ: इस दौरान देश और राज्य में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
- सबीलें (स्वागत स्टॉल): रांची की गंगा-जमुनी तहज़ीब को दर्शाते हुए जगह-जगह विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा स्टॉल (सबील) लगाए गए थे, जहाँ जुलूस में शामिल लोगों के लिए शरबत, हलवा, पानी और मिठाइयाँ बांटी जा रही थीं।
👮 प्रशासन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
- कड़े सुरक्षा इंतजाम: रांची पुलिस और जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और लगभग 1500 अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
- यातायात (Traffic) डायवर्जन: जुलूस के सुगम संचालन के लिए शहर के मुख्य मार्गों पर दोपहर से लेकर जुलूस की समाप्ति तक वाहनों के प्रवेश पर रोक (नो एंट्री) लगाई गई थी और रूट में बदलाव किया गया था।
- गाइडलाइंस का पालन: प्रशासन की गाइडलाइंस के अनुसार जुलूस में डीजे (DJ) बजाने, बड़ी गाड़ियों के इस्तेमाल और किसी भी बाहरी देश के झंडे के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक थी, जिसका पालन करते हुए यह आयोजन बेहद अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।




