रांची : शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी के अवसर पर रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) परिसर में पारंपरिक फूलपाती शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान गोरखा जवान अपने परिवारों के साथ उत्साह से शामिल हुए। करीब 146 साल पुरानी इस परंपरा को लेकर पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा।
शोभायात्रा में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पारंपरिक कपड़ों में नजर आए। ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों के बीच सभी नाचते-गाते आगे बढ़े। इस दौरान गोरखा जवानों ने मां दुर्गा को हवाई फायरिंग कर सैन्य सलामी दी और शस्त्र पूजन भी किया।
1880 से चली आ रही है फूलपाती की परंपरा
जैप-1 परिसर में दुर्गा पूजा की परंपरा वर्ष 1880 से चली आ रही है। ब्रिटिश काल में शुरू हुई इस पूजा में गोरखा समुदाय आज भी अपनी पुरानी परंपराओं का पालन करता है।
महासप्तमी के दिन नौ प्रकार की पवित्र वनस्पतियों की पूजा की जाती है, जिसे फूलपाती कहा जाता है। इनमें केला, गन्ना, बेलपत्र और हल्दी सहित अन्य पौधों की पत्तियां और टहनियां शामिल होती हैं। इन वनस्पतियों को देवी शक्ति के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद फूलपाती को शोभायात्रा के रूप में मुख्य पूजा स्थल तक लाया जाता है।
जैप-1 में मूर्ति नहीं, कलश की होती है पूजा
जैप-1 की दुर्गा पूजा की खास बात यह है कि यहां मां दुर्गा की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाती है। इसके बजाय कलश को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। पूरे नवरात्र के दौरान विधि-विधान से कलश की पूजा-अर्चना होती है।
इस साल भी महासप्तमी पर गोरखा समुदाय के लोगों ने पारंपरिक तरीके से पूजा की। शोभायात्रा के दौरान गोरखा संस्कृति की झलक देखने को मिली।
गोरखा जवानों ने किया शस्त्र पूजन
फूलपाती शोभायात्रा के दौरान गोरखा जवानों ने मां दुर्गा को सैन्य सलामी दी। इसके लिए परंपरा के अनुसार हवाई फायरिंग की गई। इसके बाद जवानों ने अपने शस्त्रों की पूजा की।
गोरखा समुदाय में मां दुर्गा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। जवानों ने पूजा के दौरान देश की सुरक्षा और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह से दोपहर तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गोरखा जवान और उनके परिवार के सदस्य शामिल हुए।




