Patna: बिहार में मनरेगा के स्थान पर नए स्वरूप और प्रावधानों के साथ लागू की गई ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना ग्रामीण अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने का सबसे मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुई इस योजना के तहत बीते तीन महीनों में राज्यभर में रिकॉर्ड 1 करोड़ 92 लाख 95 हजार मानव दिवस (Person-days) का सृजन किया जा चुका है। इस उपलब्धि की सबसे अहम बात यह है कि कुल सृजित मानव दिवसों में महिलाओं की भागीदारी 1 करोड़ 11 लाख 64 हजार यानी करीब 57.86 प्रतिशत रही है।
100 की जगह अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी
पूर्ववर्ती मनरेगा व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल भर में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी। वहीं नई ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के अंतर्गत इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। रोजगार अवधि में इस विस्तार से ग्रामीण मजदूरों की वार्षिक आय में सीधा इजाफा हुआ है और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा और पुख्ता हुई है। योजना का मुख्य फोकस केवल मजदूरी तक सीमित न रहकर गांव में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और आजीविका संवर्धन पर है।
बायोमेट्रिक और चेहरा सत्यापन से आई पारदर्शिता
योजना के क्रियान्वयन में धांधली रोकने और पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए तकनीकी का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। कार्यस्थलों पर बायोमेट्रिक और चेहरा प्रमाणीकरण (Face Authentication) के साथ डिजिटल हाजिरी अनिवार्य की गई है। इसके अलावा मजदूरी भुगतान सीधे खातों में भेजा जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। परियोजना के तहत जल संरक्षण, हरित विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनी योजना: श्रवण कुमार
ग्रामीण विकास एवं सूचना जन-सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह योजना राज्य में ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही है। मात्र तीन महीनों में 57 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की हिस्सेदारी विभाग के संकल्प को सिद्ध करती है। डिजिटल निगरानी और बायोमेट्रिक व्यवस्था से योजना पूरी तरह पारदर्शी बनी है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक ठोस और ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।





