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बरी महिला को प्रोबेशन होम भेजने का आदेश, शेल्टर होम की स्थिति पर मांगी रिपोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की दो टूक: दूतावास से हल निकाले और 19 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करे सरकार

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Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद एक विदेशी महिला को आपराधिक मामले से बरी किए जाने के बाद भी लगातार हिरासत में रखे जाने और उसके साथ हुई दरिंदगी के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि पीड़िता को सुरक्षित वातावरण देने के लिए प्रोबेशन होम में स्थानांतरित करने की तैयारी है। इस पर न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित महिला को बिना किसी विलंब के प्रोबेशन होम शिफ्ट किया जाए।

शेल्टर होम और डिटेंशन सेंटरों की जमीनी स्थिति पर रिपोर्ट तलब

खंडपीठ ने राज्य में चल रहे शरण स्थलों और डिटेंशन सेंटरों की बदहाली पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार को 19 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें राज्य के चारों डिटेंशन सेंटरों के साथ-साथ सरकार और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा संचालित सभी महिला शेल्टर होम की मौजूदा स्थिति, वहां उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है।

डिपोर्टेशन पर गतिरोध, बांग्लादेश दूतावास से संवाद का सुझाव

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि महिला को बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया में अब तक क्या ठोस प्रगति हुई है। केंद्र के अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि बांग्लादेशी दूतावास को इस संदर्भ में आधिकारिक पत्र भेजा गया है, किंतु अभी तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि केवल पत्राचार के भरोसे रहने के बजाय राजनयिक स्तर पर बांग्लादेशी एंबेसी से सीधी बातचीत कर इस मानवीय मसले का शीघ्र समाधान निकाला जाए। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अंकित अपूर्वा ने पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि महिला के डिपोर्टेशन को लेकर वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन मामला अधर में लटका रहा।

कस्टोडियल रेप पर एफआईआर की धाराओं में संशोधन का भरोसा

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की सीलबंद जांच रिपोर्ट में तीन पुलिसकर्मियों द्वारा महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई। राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया कि आरोपित तीनों कांस्टेबलों को निलंबित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हालांकि, एफआईआर में दर्ज कानूनी धाराओं को लेकर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाए। इस पर महाधिवक्ता ने आश्वस्त किया कि एफआईआर में जरूरी व सख्त धाराओं का संशोधन कर दिया जाएगा। अदालत ने पीड़िता को हरसंभव चिकित्सकीय और आवश्यक मानवीय सुविधाएं मुहैया कराने का भी कड़ा निर्देश दिया है।
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