Dhanbad: झारखंड के धनबाद में वन्यजीवों के अंगों की अवैध तस्करी करने वाले एक गिरोह का वन विभाग ने पर्दाफाश किया है। मेमको मोड़ स्थित एक निजी होटल में जाल बिछाकर वन विभाग की टीम ने तीन शातिर तस्करों को रंगे हाथ दबोच लिया। इनके पास से तेंदुए और पेंगोलिन से जुड़े कुल 35 प्रतिबंधित आर्टिकल बरामद किए गए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 35 से 40 लाख रुपये आंकी जा रही है।
सात दिनों की रेकी और फिल्मी अंदाज में जाल
धनबाद वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) विकास पालीवाल को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के एक निजी होटल में दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों का सौदा होने वाला है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने करीब एक सप्ताह तक संदिग्धों की पल-पल की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी।
जब पुष्टि हो गई कि होटल में प्रतिबंधित सामान मौजूद है, तो अधिकारियों ने किसी फिल्मी थ्रिलर की तरह फर्जी ग्राहक बनकर तस्करों से संपर्क साधा। सौदेबाजी के बहाने कमरे में दाखिल होते ही टीम ने पुख्ता सबूतों के साथ तीनों आरोपियों को धर दबोचा।
तेंदुए के नाखून, खाल और पेंगोलिन के अवशेष जब्त
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद शाहबाज खान, वसीम असगर खान और भूली निवासी शहजादा खुर्रम के रूप में हुई है। मौके से बरामद 35 संदिग्ध सामग्रियों में तेंदुए के नाखून, दांत, रीढ़ की हड्डी और खाल के हिस्से शामिल हैं। इसके अलावा दुर्लभ पेंगोलिन से जुड़े अवशेष होने की भी प्रबल आशंका है। वन विभाग के अनुसार, इन सभी अंगों की सटीक वैज्ञानिक पुष्टि के लिए इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और अंधविश्वास का खेल
डीएफओ विकास पालीवाल ने बताया कि त्योहारों और पूजा-पाठ के दौरान तंत्र-मंत्र व अंधविश्वास के नाम पर ऐसे वन्यजीव अंगों की मांग बढ़ जाती है। तस्कर इसी का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूलते हैं। जब्त मोबाइल फोनों के कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल डेटा की पड़ताल की जा रही है, जिससे यह साफ हो सके कि ये अंग कहां से लाए गए थे और डिलीवरी किसे दी जानी थी। विभाग को इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़े होने का भी अंदेशा है। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो सके।




