Patna: पंचायती राज विभाग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चयन को लेकर विभिन्न स्तर पर फैलाए जा रहे भ्रम और भ्रामक प्रचार पर पूरी तरह स्थिति स्पष्ट कर दी है। विभाग ने बताया है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज जनप्रतिनिधि संघ की ओर से एसबीआई के चयन को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और पूरी तरह निराधार हैं।
एसबीआई के चयन की पारदर्शी प्रक्रिया
विभाग के अनुसार, 16वें वित्त आयोग के तहत बैंक चयन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय की गाइडलाइन के आधार पर 11 जुलाई को समाचार पत्रों में आधिकारिक विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत कुल 20 बैंकों ने अपने आवेदन दिए थे।
विभाग की उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा सभी बैंकों के प्रस्तावों और उनके विस्तृत प्रेजेंटेशन की गहन समीक्षा की गई। इसके बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर एसबीआई (SBI) का चयन किया गया:
योग्यता और कार्यकुशलता: बैंक की वित्तीय साख और तकनीकी दक्षता।
भौगोलिक पहुंच: ग्रामीण स्तर तक बैंक शाखाओं की व्यापक संख्या।
अनुभव: सरकारी खातों को संभालने का लंबा और सफल अनुभव।
भरोसा और तकनीकी सहायता: समय पर और सुगम तकनीकी मदद उपलब्ध कराने की क्षमता।
16वें वित्त आयोग में नए बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
पूर्व में 15वें वित्त आयोग के तहत निधि (फंड) प्रबंधन के लिए विभिन्न अलग-अलग बैंकों में खाते खोलने का प्रावधान था। इस व्यवस्था के कारण राशि भेजने, खर्च करने और उसकी निगरानी (ट्रैकिंग) करने में कई तरह की व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं। इसके अलावा, मुख्यालय और जिला स्तर पर बैंक की समर्पित टीम उपलब्ध न होने के कारण समय पर तकनीकी सहायता भी नहीं मिल पा रही थी।
इन्हीं सभी समस्याओं के स्थायी समाधान और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ही 16वें वित्त आयोग के प्रावधानों के अंतर्गत पूरी तरह पारदर्शी तरीके से एक ही बैंक के चयन का निर्णय लिया गया था, ताकि ग्रामीण विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।




