Patna: बिहार में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में वाराणसी–रांची–कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-319E) मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से करीब 800 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर का 33.50 किलोमीटर हिस्सा बिहार के गया जिले से होकर गुजरेगा। इस आधुनिक 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण से न केवल गया और मगध क्षेत्र, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच का आवागमन बेहद तेज और सुगम हो जाएगा।
पैकेज-7 के तहत 1,248 करोड़ की लागत, 28% काम पूरा
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, परियोजना के पैकेज-7 के तहत गया के डुमरिया प्रखंड स्थित अनिर्बनसलिया गांव से इमामगंज प्रखंड के संग्रामपुर तक 33.5 किलोमीटर लंबी 6-लेन सड़क बनाई जा रही है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,248.37 करोड़ रुपये है। 1 जुलाई 2025 से शुरू हुए इस निर्माण कार्य की पूर्ण होने की समय सीमा 30 जून 2027 तय की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक इस परियोजना का लगभग 28.2 प्रतिशत भौतिक कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और काम तय गति से आगे बढ़ रहा है।
बोधगया और गया में पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि इस आधुनिक कॉरिडोर के शुरू होने से यात्रा का समय काफी घट जाएगा। खासकर भारी वाहनों और मालवाहकों को बिना किसी जाम के सुगम मार्ग मिलेगा, जिससे ईंधन और समय दोनों की बचत होगी। इसके अलावा, वाराणसी (काशी), रांची और कोलकाता से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल बोधगया और गया पहुंचना काफी आरामदायक हो जाएगा। इससे स्थानीय होटल उद्योग, हस्तशिल्प और पर्यटन व्यवसाय को नई गति मिलेगी।
किसानों को मिलेंगे बड़े बाजार, घटेगा लॉजिस्टिक्स खर्च
प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र कुमार बंसल ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से ग्रामीण इलाकों के किसानों और छोटे व्यापारियों की किस्मत बदलेगी। वे अपनी कृषि उपज और स्थानीय उत्पादों को सीधे कोलकाता, रांची और वाराणसी जैसे महानगरों के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचा सकेंगे। बेहतर और सीधी सड़क मिलने से लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का उचित और बेहतर मूल्य मिल सकेगा।




