Nagoya, (Japan): एशियन गेम्स 2026 में भारत के स्टार पहलवान नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन कुश्ती में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। गुरुवार को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए पुरुषों के 97 किग्रा भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में नितेश को मेजबान जापान के यूरी नकाजातो के हाथों 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि स्वर्ण पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन नितेश का फाइनल तक का यह सफर भारतीय खेल इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
64 साल बाद ग्रीको-रोमन फाइनल में पहुंचे भारतीय
नितेश सिवाच 1962 के बाद से एशियन गेम्स के ग्रीको-रोमन कुश्ती वर्ग के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं। उनसे पहले 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में दिग्गज पहलवान मारुति माने ने इसी वेट कैटेगरी (97 किग्रा) में भारत के लिए रजत पदक जीता था। करीब 64 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय रेसलर ने इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता के ग्रीको-रोमन फाइनल में अपनी जगह पक्की की।
फाइनल में जापानी प्रतिद्वंद्वी का दबदबा
स्वर्ण पदक के लिए हुए कड़े मुकाबले में जापानी पहलवान नकाजातो शुरू से ही आक्रामक रणनीति के साथ मैट पर उतरे। मुकाबले के पहले राउंड में नितेश को पैसिविटी (अक्रियता) के चलते पेनाल्टी मिली, जिससे नकाजातो ने 2 अंक लेकर अपनी बढ़त बना ली। इसके बाद भारतीय पहलवान डिफेंसिव मोड में आ गए और जापानी खिलाड़ी के कई हमलों को नाकाम किया। ब्रेक के समय नितेश 0-2 से पीछे थे। दूसरे हाफ में नितेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन नकाजातो ने मुकाबले की गति पर नियंत्रण बनाए रखा और भारतीय पहलवान को गिराकर स्कोर 4-0 कर दिया। अंत तक नितेश वापसी का मौका नहीं बना सके और मुकाबला गंवा बैठे।
क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में किया था क्लीन स्वीप
नितेश सिवाच का फाइनल तक का सफर बेहद धमाकेदार रहा था। उन्होंने अपने नॉकआउट अभियान की शुरुआत क्वार्टर फाइनल में तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्डी अगामामेदोव को 7-1 से एकतरफा मात देकर की थी। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने और भी ज्यादा आक्रामक खेल दिखाते हुए मंगोलिया के गनबातारिन गनखुयाग को 9-0 के बड़े अंतर से पटखनी देकर फाइनल का टिकट कटाया था।




