शेखपुरा : गांव में रहकर रोजगार करने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए पशुपालन और मुर्गी पालन अच्छा विकल्प बन रहा है। सरकार भी इन व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता और सब्सिडी दे रही है। इनमें बिहार समग्र गव्य विकास योजना, एकीकृत पोल्ट्री विकास योजना और राष्ट्रीय पशुधन मिशन प्रमुख हैं।
इसी का उदाहरण शेखपुरा के चंदन कुमार हैं। उन्होंने ‘आत्मा’ योजना के तहत मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मुर्गी पालन की तकनीक, बेहतर प्रबंधन और व्यवसाय से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने मुर्गी पालन को अपना रोजगार बनाया और धीरे-धीरे कारोबार बढ़ाया।
चंदन कुमार ने बताया कि मुर्गी के बच्चे लाने के करीब 25 दिनों बाद उनका वजन 1.20 से 1.25 किलो तक हो जाता है। इसके बाद उन्हें बाजार में बेच दिया जाता है। सीधे बाजार में बिक्री करने पर करीब 130 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिल जाती है, जबकि डीलर के माध्यम से बेचने पर 110 से 115 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिलती है।
चंदन कुमार के अनुसार, मुर्गी पालन से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है और उनका परिवार भी इस काम से खुश है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी का इस्तेमाल कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया है।
‘आत्मा’ यानी कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण के माध्यम से किसानों को कृषि, बागवानी, पशुपालन और कौशल विकास से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण युवाओं तक नई तकनीक और जरूरी जानकारी पहुंचाना है।
चंदन कुमार की कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण और मेहनत के जरिए गांव में रहकर भी रोजगार शुरू किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ लेकर ग्रामीण युवा मुर्गी पालन जैसे व्यवसाय के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।




