पटना : नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद उत्तर बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल रहा है।
पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया है। चंपारण तटबंध तीन जगह टूटने की सूचना है। बथुवरिया, बैरिया के फुलियाखाड़ और आसपास के गांवों में पानी फैल गया है। कई ग्रामीणों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ा है। जल संसाधन विभाग और प्रशासन की टीमें तटबंध की मरम्मत और कटाव रोकने में जुटी हैं।
मुजफ्फरपुर के सरैया क्षेत्र में भी गंडक का जलस्तर बढ़ रहा है। रेवाघाट में नदी का पानी मंदिर परिसर तक पहुंचने की सूचना है। प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और राहत-बचाव की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।
कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पटना के गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 48.85 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 48.60 मीटर से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। दीघाघाट पर भी गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर है।
भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा 35.08 मीटर पर पहुंच गई है, जबकि खतरे का निशान 34.50 मीटर है। कहलगांव में जलस्तर खतरे के निशान के करीब है।
सुपौल के वीरपुर में कोसी का जलस्तर 75.29 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 74.70 मीटर से ऊपर है। खगड़िया के बलतरा में भी कोसी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सीतामढ़ी के ढेंग ब्रिज पर बागमती का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर है। सीवान के दरौली में घाघरा भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई है।
15 जिलों में पहले प्रभावित हुए थे करीब 50 लाख लोग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर के मध्य तक बिहार के 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल थे।
हालांकि, मौजूदा स्थिति में नेपाल से आए पानी का ज्यादा असर उत्तर बिहार के डाउनस्ट्रीम जिलों में दिखाई दे रहा है।
फिलहाल भारी बारिश की चेतावनी नहीं
मौसम विभाग के पटना केंद्र के अनुसार 30 सितंबर, 1 और 2 अक्टूबर को बिहार के लिए कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 3 से 5 अक्टूबर के बीच गरज-चमक और आंधी की संभावना जताई गई है।
फिलहाल बाढ़ का मुख्य कारण नई भारी बारिश के बजाय नदियों में पहले से मौजूद अतिरिक्त पानी, बढ़ता जलस्तर और तटबंधों पर बढ़ा दबाव बताया जा रहा है।




