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बिहार: जनजातीय इलाकों में पहुंचेगा विकास, 24 जिलों में होगा सीधा संवाद

बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा 24 चिन्हित जिलों में सम्मेलन आयोजित कर जनजातीय समुदायों से सीधा संवाद किया जा रहा है, ताकि स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।

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Patna: बिहार के जनजातीय समुदायों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को सीधे समझकर विकास की रूपरेखा तय करने की कवायद तेज हो गई है। बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (BSTJRTI) की ओर से प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत राज्य के 24 चिन्हित जिलों में विशेष सम्मेलन-सह-संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों का मुख्य मकसद जनजातीय समाज से सीधा संवाद कायम कर उनकी बुनियादी समस्याओं, वास्तविक प्राथमिकताओं और जमीनी आवश्यकताओं को चिन्हित करना है, ताकि संबंधित विभागों के समन्वय से उनके त्वरित समाधान की ठोस पहल हो सके।

चार जिलों में सम्मेलन पूरे, 20 अन्य में तैयारी

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक चार जिलों में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। शुरुआती चरण में सुपौल, नवादा, रोहतास और पूर्वी चंपारण जिलों में सम्मेलन आयोजित किए गए, जहां स्थानीय जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ कई अहम मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इन सम्मेलनों से जो सुझाव और जमीनी समस्याएं सामने आई हैं, उन्हें संकलित कर संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है। विभाग अब शेष बचे 20 चिन्हित जिलों में भी इसी तर्ज पर संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करने में जुटा हुआ है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर विशेष मंथन

इन सम्मेलनों का केंद्र बिंदु केवल समस्याओं को सूचीबद्ध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने में आ रही प्रशासनिक व स्थानीय बाधाओं को दूर करना भी है। बैठकों में जनजातीय बच्चों की शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वरोजगार, आजीविका के साधन, कौशल विकास, पक्के आवास, शुद्ध पेयजल, सड़क और निर्बाध बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी विषयों पर समुदाय के साथ गहन चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक धरोहरों और रीति-रिवाजों के संरक्षण को भी विकास एजेंडे में प्राथमिकता दी जा रही है।

स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बनेगा विकास मॉडल

अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब योजनाओं का निर्धारण बंद कमरों के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाए। सीधे संवाद के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि किस क्षेत्र के लोगों को किस योजना में सबसे ज्यादा मदद की दरकार है और सरकारी सहायता मिलने में उन्हें किन व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्राप्त फीडबैक के आधार पर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी व सुलभ बनाया जाएगा।

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