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छात्र आंदोलन पर राजनीति बंद करे सरकार, SFI ने सदर अस्पताल में घायलों से की मुलाकात

शिक्षा और भविष्य ही छात्रों का धर्म, जयपाल सिंह स्टेडियम आंदोलन पर SFI का कड़ा रुख, पुलिस लाठीचार्ज और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल, JPSC-JSSC धांधली की उच्चस्तरीय जांच की मांग

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रांची: राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्पष्ट कहा है कि छात्रों के इस लोकतांत्रिक और जायज आंदोलन का राजनीतिकरण पूरी तरह बंद होना चाहिए। SFI नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि छात्रों की मांगों को राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से देखने के बजाय तुरंत उनसे बातचीत कर समाधान निकाला जाए।

पुलिस कार्रवाई की निंदा, सदर अस्पताल पहुंचे प्रतिनिधि

SFI के एक प्रतिनिधिमंडल ने सदर अस्पताल पहुंचकर आंदोलन के दौरान घायल हुए और भर्ती छात्रों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। संगठन ने आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और अनावश्यक बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि घायल छात्रों को बेहतर और पूरी तरह मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो।

हथियार और हमले की घटनाओं पर चिंता

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए SFI के जिला संयोजक ओजस्वी राज और सह-संयोजक फिज़ा अहमद ने कहा कि आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा पर कथित हमले और आंदोलन स्थल पर एक व्यक्ति द्वारा हथियार लाए जाने जैसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं। आरोप लगाया गया कि कुछ राजनीतिक दल और असामाजिक तत्व छात्र आंदोलन में घुसकर माहौल को खराब करने और छात्रों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। SFI ने ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई और आंदोलन की सुरक्षा की मांग की।

JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली की उच्चस्तरीय जांच की मांग

संगठन ने कहा कि शिक्षा और रोजगार छात्रों का बुनियादी अधिकार है। JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
इसके साथ ही SFI ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के नाम पर ली जाने वाली अतिरिक्त फीस, मार्कशीट व माइग्रेशन के नाम पर होने वाली अवैध वसूली और शिक्षा के अंधाधुंध निजीकरण पर रोक लगाने की पुरजोर वकालत की। नेताओं ने कहा कि “जिस प्रकार अनाज खाने का कोई धर्म नहीं होता, उसी प्रकार छात्रों की भी कोई जाति या धर्म नहीं होता, उनका एकमात्र धर्म शिक्षा और बेहतर भविष्य है।”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ओजस्वी राज, फिज़ा अहमद, सोमा, सोनाली, फैज़ान और पूर्व सदस्य अमन ने संबोधित किया।
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