रांची/हजारीबाग। हजारीबाग शहर की खराब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शहर के पुराने बस स्टैंड को शहर से बाहर शिफ्ट करने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि हजारीबाग में बाईपास बन चुका है, इसलिए शहर के बीच बस स्टैंड चलाने की जरूरत नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। पूर्व आदेशों का पालन करते हुए व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल नहीं करने पर कोर्ट ने हजारीबाग के उपायुक्त, एसपी और नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया।
अदालत ने तीनों अधिकारियों को 10 मार्च तक व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों के कनीय पदाधिकारियों के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किए जाने पर नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने बताया कि शहर में सड़क अतिक्रमण, पार्किंग स्थलों पर कब्जे और खराब सीसीटीवी कैमरों की समस्या अब भी बनी हुई है। कोर्ट ने कहा कि केवल कागजों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन पर भी सुधार दिखाई देना चाहिए।
अदालत ने पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराने और खराब सीसीटीवी कैमरों को चालू करने का निर्देश दिया। बताया गया कि वर्ष 2017 में लगाए गए करीब 160 सीसीटीवी कैमरे रखरखाव के लिए AMC नहीं होने के कारण बंद पड़े हैं।
कोर्ट ने उपायुक्त, एसपी और नगर आयुक्त को संयुक्त बैठक कर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की समीक्षा करने और समाधान से जुड़ा विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।




