Patna: बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना राज्य के हजारों युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार के सपनों को साकार करने का एक मजबूत जरिया बनकर उभरी है। योजना से मिली आर्थिक सहायता के बल पर युवा न सिर्फ खुद का कारोबार स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अपने ही क्षेत्र में दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। बांका के विक्रम कुमार साह और बेगूसराय के मो. इबरार जैसे युवाओं की सफलता की कहानियां इस योजना के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
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दुकान में रिपेयरिंग करने वाले विक्रम अब कमा रहे हैं सालाना 10 लाख

बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड निवासी विक्रम कुमार साह योजना के चयन से पहले एक छोटी सी दुकान में पंखा और कूलर रिपेयरिंग का काम करते थे। योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने ऑनलाइन आवेदन दिया, जिसके बाद उन्हें 7 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। आज विक्रम अपने गृह जिले बांका में कूलर, हीटर और फैन असेंबलिंग का बड़ा कारोबार चला रहे हैं और सालाना 10 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी यूनिट में दो स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है।
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बेगूसराय के मो. इबरार ने गांव में शुरू किया साइबर कैफे

दूसरी तरफ, बेगूसराय के पोखरिया गांव निवासी मो. इबरार को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आर्थिक तंगी के कारण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जाने का डर सता रहा था। हालांकि, साल 2024-25 में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने अपने ही गांव में एक अत्याधुनिक साइबर कैफे शुरू किया। अब वे स्थानीय युवाओं को सरकारी योजनाओं और नौकरियों के ऑनलाइन आवेदन में मदद दे रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय हो रही है और वे अपने व्यवसाय का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
हर जिले में मार्गदर्शन के लिए तैनात हैं जीएम डीआईसी अधिकारी
उद्योग विभाग इस योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से हर पात्र युवा तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक जिले में जीएम डीआईसी (GM DIC) स्तर के अधिकारियों को तैनात किया गया है। ये अधिकारी आवेदन प्रक्रिया से लेकर लोन स्वीकृति और बिजनेस सेटअप तक लाभार्थियों को लगातार मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।
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