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राशन दुकान से लेकर अस्पताल तक अध्यक्ष शबनम परवीन की सीधी जांच

स्कूलों में गैस के बिना चूल्हे पर खाना और बच्चों से काम कराने पर जताई सख्त नाराजगी

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पाकुड़: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) से जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातलीय सच जानने के लिए झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष सह सदस्य शबनम परवीन ने पाकुड़ जिले के विभिन्न सरकारी संस्थानों का सघन स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी विद्यालयों, जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों और सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र (MTC) का जायजा लिया। इस दौरान जहां कई व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, वहीं कई स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं उजागर होने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

स्कूलों में नियम विरुद्ध चूल्हे पर पक रहा खाना, बच्चों से काम कराने पर सख्त रुख

निरीक्षण के क्रम में प्रभारी अध्यक्ष सबसे पहले उत्क्रमित मध्य विद्यालय सोनाजोड़ी एवं मध्य विद्यालय मंगलापाड़ा पहुंचीं। दोनों ही विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (MDM) पकाने के लिए एलपीजी कुकिंग गैस के बजाय नियम विरुद्ध लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल होते पाया गया। पूछताछ करने पर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने बताया कि पिछले चार महीनों से गैस मद में राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सबसे चिंताजनक स्थिति मध्य विद्यालय मंगलापाड़ा में देखने को मिली, जहां निरीक्षण के दौरान स्कूली बच्चों से नींबू कटवाया जा रहा था। बाल मजदूरी और नियम उल्लंघन के इस कृत्य पर शबनम परवीन ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में दोषी कर्मचारियों व शिक्षकों के खिलाफ जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) के माध्यम से तत्काल आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी विद्यालयों में भोजन अनिवार्य रूप से कुकिंग गैस पर ही बनना चाहिए और इसके लिए बजट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडे के वितरण में कटौती पर बिफरीं अध्यक्ष

आंगनबाड़ी केंद्र मटिया पहाड़ी (कोड: 20353050103) और सोनाजोड़ी (कोड: 20353050201) के निरीक्षण में बच्चों के पोषण आहार में भारी लापरवाही पाई गई। नियम के मुताबिक बच्चों को दैनिक रूप से अंडा दिया जाना चाहिए, लेकिन मटिया पहाड़ी केंद्र में सप्ताह में केवल 3 दिन और सोनाजोड़ी केंद्र में महज 2 दिन ही अंडा दिए जाने की बात सामने आई।

प्रभारी अध्यक्ष ने इस ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों के पोषण स्तर से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार प्रतिदिन अंडा और नियमित रूप से हलुआ वितरित करना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

पीडीएस दुकान और एमटीसी केंद्र की व्यवस्थाएं पाई गईं दुरुस्त

निरीक्षण के अगले चरण में भगतपाड़ा स्थित राशन डीलर भूलन प्रसाद भगत (अनुज्ञप्ति संख्या 27/85) की जन वितरण प्रणाली दुकान की जांच की गई। दुकान के बाहर पारदर्शी तरीके से सूचना पट्ट अंकित पाया गया। मौके पर मौजूद लाभुकों से पूछताछ करने पर उन्होंने समय पर पूरा राशन मिलने, रसीद/पर्ची प्रदान किए जाने और किसी प्रकार की वसूली न होने पर संतोष व्यक्त किया।
इसके पश्चात सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र (MTC) का निरीक्षण किया गया। 15 बेड की क्षमता वाले इस केंद्र में 2 कुपोषित बच्चे भर्ती पाए गए। केंद्र में भर्ती बच्चों की माताओं ने बताया कि यहां बच्चों का समुचित इलाज हो रहा है, गुणवत्तापूर्ण भोजन दिया जा रहा है और दैनिक भत्ते के रूप में ₹130 की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है। केंद्र की साफ-सफाई और चिकित्सा सेवाओं पर अध्यक्ष ने प्रसन्नता जताई।

परिसदन भवन में समीक्षा बैठक: ‘जिले में भूख से न हो कोई मौत’

तमाम संस्थानों का जायजा लेने के बाद पाकुड़ परिसदन सभागार में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अपर समाहर्ता, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक और सीडीपीओ सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी अध्यक्ष शबनम परवीन ने कड़े शब्दों में कहा, “सरकार की योजनाओं का मुख्य ध्येय समाज के अंतिम व्यक्ति तक गरिमापूर्ण भोजन और पोषण पहुंचाना है। अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ कागजी संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लाभुक तक उसका हक समय पर पहुंचे।”
उन्होंने जिला प्रशासन को स्पष्ट हिदायत दी कि पाकुड़ जिले में भूख के कारण किसी भी व्यक्ति या परिवार की स्थिति गंभीर नहीं होनी चाहिए। यदि कोई अत्यंत जरूरतमंद परिवार सामने आता है जिसके पास भोजन का कोई साधन न हो, तो उसे तत्काल आपातकालीन राहत कोष से 10 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही ऐसे परिवारों का प्राथमिकता के आधार पर तुरंत राशन कार्ड बनाकर उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत नियमित खाद्यान्न से जोड़ा जाए।
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