Mumbai : बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ **तरुण तेजपाल** को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने मई 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है। गोवा में आयोजित **‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम** के दौरान तहलका की एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
शिकायत के बाद 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। सितंबर 2017 में अदालत ने उनके खिलाफ रेप, यौन उत्पीड़न और गलत तरीके से रोकने जैसी धाराओं में आरोप तय किए थे।
ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
मई 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।
इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया।
तरुण तेजपाल ने फैसले को चुनौती देने की बात कही
हाई कोर्ट के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने खुद को राजनीतिक बदले की कार्रवाई का शिकार बताया और कहा कि उनकी पत्रकारिता के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
तेजपाल ने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष और सबूत रखेंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला लंबे समय से चल रहे एक हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न मामले में आया है। इससे न्याय प्रक्रिया में पीड़ितों की शिकायतों, सबूतों और यौन अपराधों की सुनवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस भी जुड़ी है।




