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New Delhi: कुदरत अपने भीतर न जाने कितने ही अनूठे, विस्मयकारी और जादुई रहस्यों को समेटे हुए है, जिन्हें देखकर आधुनिक विज्ञान भी दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाता है। एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला प्राकृतिक अजूबा वनस्पतियों की दुनिया (World of Plants) से सामने आया है। दुनिया में एक ऐसा दुर्लभ फूल पाया जाता है जिसकी पंखुड़ियां वैसे तो सामान्य दिनों में पूरी तरह दूध जैसी सफेद होती हैं, लेकिन पानी की एक भी बूंद गिरते ही वे धीरे-धीरे बिल्कुल साफ कांच (Transparent Glass) की तरह पारदर्शी हो जाती हैं। फूलों में होने वाला यह अनोखा शारीरिक बदलाव पहली बार में किसी काल्पनिक सिनेमा या जादू जैसा लगता है, लेकिन यह सौ फीसदी सच है।
क्या है इसका वैज्ञानिक नाम (Scientific Name)?
इस अद्भुत और अनोखे पौधे का वैज्ञानिक नाम डिफाइलिया ग्रेई (Diphylleia Grayi) है, जिसे दुनिया भर में आम बोलचाल की भाषा में ‘स्केलेटन फ्लावर’ (Skeleton Flower) यानी कंकाल फूल कहा जाता है। पहली नजर में देखने पर यह किसी भी अन्य सामान्य जंगली फूल की तरह ही नजर आता है, जिसकी सफेद पंखुड़ियां और बीच का हिस्सा पीले रंग का होता है। यह दुर्लभ पौधा मुख्य रूप से जापान और चीन के बेहद ठंडे, नम और छायादार पहाड़ी जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है।
कांच जैसा दिखने के पीछे का भौतिक विज्ञान (Physics Behind Transparency)
वनस्पति शास्त्रियों (Botanists) के मुताबिक, इस फूल का सफेद रंग किसी विशेष रंगीन पिगमेंट या रासायनिक तत्व की वजह से नहीं होता है। असल में, इसकी पंखुड़ियों की कोशिकीय संरचना (Cellular Structure) के भीतर बहुत ही सूक्ष्म और छोटे-छोटे हवा के खाली स्थान (Air Pockets) होते हैं। जब सूरज की रोशनी इन खाली स्थानों पर पड़ती है, तो वह चारों तरफ बिखर (Light Scattering) जाती है, जिसके कारण यह फूल हमें सफेद रंग का दिखाई देता है।
लेकिन जैसे ही मॉनसून या बारिश का पानी (Rain Water) इन पंखुड़ियों पर गिरता है, तो पानी उन हवा वाले खाली स्थानों में पूरी तरह भर जाता है। पानी भरने के बाद रोशनी का बिखराव बंद हो जाता है और प्रकाश सीधे पंखुड़ियों के आर-पार (Light Refraction) गुजरने लगता है। यही मुख्य भौतिक कारण है कि पानी मिलते ही यह फूल पूरी तरह पारदर्शी और क्रिस्टल जैसा दिखने लगता है।
धूप आते ही वापस आ जाता है पुराना रंग
सबसे दिलचस्प बात यह है कि फूल का यह पारदर्शी रूप पूरी तरह से अस्थायी (Temporary) होता है। जैसे ही बारिश रुकती है और धूप या हवा के प्रभाव से फूल की पंखुड़ियां दोबारा सूख जाती हैं, तो उनके भीतर जमा पानी वाष्पीकृत (Evaporate) हो जाता है। खाली जगहों में फिर से हवा भरते ही यह फूल अपने पुराने मूल सफेद रंग में वापस लौट आता है। यह पूरी प्रक्रिया किसी रासायनिक क्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से प्रकाश और पानी के भौतिक विज्ञान का एक खूबसूरत तालमेल है।
यह पौधा आमतौर पर वसंत ऋतु (Spring Season) और गर्मियों की शुरुआत में खिलता है और इसके बड़े-बड़े पत्ते 40 सेंटीमीटर तक चौड़े हो सकते हैं। बारिश के दिनों में इस जादुई नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए दुनिया भर से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स (Wildlife Photographers) इन पहाड़ी जंगलों का रुख करते हैं।

