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वित्त मंत्री बेबस, अफसर खामोश : झारखंड में ₹10,000 करोड़ का ‘रहस्यमयी’ खेल

रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों ’10 हजार करोड़ रुपये’ का मुद्दा गरमाया हुआ है। नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सरकारी खजाने में भारी वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी

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रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों ’10 हजार करोड़ रुपये’ का मुद्दा गरमाया हुआ है। नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सरकारी खजाने में भारी वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए मरांडी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और राज्य के प्रशासनिक मशीनरी को कटघरे में खड़ा किया।

वित्त मंत्री की अनदेखी और अफसरों की चुप्पी

बाबूलाल मरांडी ने बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि खुद राज्य के वित्त मंत्री बार-बार विभागों से खर्च का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन उनकी बातों को अनसुना किया जा रहा है। मरांडी के अनुसार, वित्त मंत्री के निर्देश के बावजूद न तो अधिकारियों ने कोई बैठक की और न ही गायब बताई जा रही राशि का लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तिजोरी से पैसा तो निकाला गया, लेकिन वह किस मद में और किसके पास गया, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

“पंगु” मंत्री और केंद्रीकृत सत्ता का आरोप

मरांडी ने राज्य सरकार के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। उनके अनुसार, मंत्रियों को ‘पंगु’ बना दिया गया है और वे अपने ही विभागों में स्वतंत्र रूप से कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार का यह खेल इतना बड़ा है कि अधिकारियों को ऊपर से “चुप रहने” के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

तीन महीने से दबी है फाइल

भ्रष्टाचार के आरोपों को और धार देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह कोई सामान्य चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित घोटाला है। उन्होंने मुख्य सचिव पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से जांच से जुड़ी फाइलों को दबाकर रखा गया है। मरांडी ने संकल्प दोहराया कि वे इस पूरे मामले को जनता के बीच ले जाएंगे और सक्षम केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल भिजवाने के लिए संघर्ष करेंगे।

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