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चारधाम यात्रा होगी अब आसान! अंतिम चरण में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट; जानें पूरा रूट

Rishikesh (Uttarakhand): देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक खबर है। भारतीय रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन’ का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। 125 किलोमीटर लंबी

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Rishikesh (Uttarakhand): देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक खबर है। भारतीय रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन’ का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन न केवल पहाड़ों के उबाऊ सड़क सफर को खत्म करेगी, बल्कि चारधाम (गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) की दूरी और समय को भी काफी कम कर देगी।

इंजीनियरिंग का अजूबा: 105 किलोमीटर का सफर सुरंगों के भीतर

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका अद्भुत इंजीनियरिंग कौशल है। 125 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग का लगभग 105 किलोमीटर हिस्सा 16 मुख्य सुरंगों (Tunnels) से होकर गुजरेगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्य सुरंगों के समानांतर 12 ‘निकास सुरंगें’ भी बनाई गई हैं। अब तक 160 किलोमीटर से अधिक की खुदाई का काम पूरा हो चुका है और अब जल्द ही मेट्रो की तर्ज पर हाई-टेक ट्रैक बिछाने का काम शुरू होगा।

इन जिलों और स्टेशनों को जोड़ेगी यह लाइन

ऋषिकेश से शुरू होकर यह ट्रेन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे महत्वपूर्ण जिलों को छुएगी।

  • प्रमुख स्टेशन: श्रीनगर गढ़वाल, गोचर, कालेश्वर और कर्णप्रयाग।

  • सबसे लंबी सुरंग: परियोजना में 14.58 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है, जो देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंगों में शुमार होगी।

  • सामरिक महत्व: चीन सीमा के करीब होने के कारण यह रेल लाइन सामरिक दृष्टिकोण से भी भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

बुजुर्गों और बच्चों के लिए वरदान

पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर मोशन सिकनेस और थकान की वजह से बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी होती थी। अब ट्रेन के माध्यम से श्रद्धालु सीधे कर्णप्रयाग तक पहुंच सकेंगे, जहाँ से केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए सड़क मार्ग का सफर काफी छोटा रह जाएगा। रेलवे की इस पहल से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई पंख मिलेंगे।

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