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यूजीसी के नए नियमों पर ‘रण’! जमशेदपुर में सवर्ण महासंघ का हल्ला बोल

Jamshedpur: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 के विरोध में शनिवार को सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से जिला स्तर पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन जमशेदपुर

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Jamshedpur: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 के विरोध में शनिवार को सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से जिला स्तर पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया।

प्रदर्शन के दौरान सवर्ण महासंघ के कार्यकर्ताओं ने “समान अधिकार हमारा हक है”, “संविधान विरोधी विनियम वापस लो” और “सभी वर्गों के लिए समान न्याय” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं में अधिसूचना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।

इसके उपरांत सवर्ण महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू एवं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी द्वारा जारी उक्त अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई।
इस अवसर पर सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष धनुर्धर त्रिपाठी ने कहा कि यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता स्थापित करने के नाम पर केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों और संरक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज करती है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 की मूल भावना के विरुद्ध है।

धनुर्धर त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि इस विनियम में झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर किसी भी प्रकार का दंडात्मक प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे इसके दुरुपयोग की व्यापक संभावना बन गई है। इसके कारण देश के कई राज्यों में विश्वविद्यालय परिसरों में भय, असंतोष और असमानता का माहौल उत्पन्न हो रहा है।

महासंघ के जिला पदाधिकारियों ने बताया कि भारत की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई आबादी सामान्य वर्ग की है। इसके बावजूद इस प्रकार की अधिसूचनाएं सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग और राजस्व सृजन में सामान्य वर्ग का योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहा है।

प्रदर्शन में सवर्ण महासंघ के जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री, विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, युवा इकाई के सदस्य एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में अधिसूचना को वापस लेने की मांग की।

महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि इस अधिसूचना को शीघ्र वापस नहीं लिया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से आंदोलन को और तेज करेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक उपाय भी अपनाएगा।

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