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ब्रिटेन में जंक फूड विज्ञापन पर बड़ा बैन, भारत में अब भी ढील

World News: बच्चों में बढ़ते मोटापे को गंभीर चुनौती मानते हुए ब्रिटेन ने जंक फूड के विज्ञापनों पर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब रात 9 बजे से पहले टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे खाद्य उत्पादों के विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे, जिनमें फैट,

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World News: बच्चों में बढ़ते मोटापे को गंभीर चुनौती मानते हुए ब्रिटेन ने जंक फूड के विज्ञापनों पर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब रात 9 बजे से पहले टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे खाद्य उत्पादों के विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे, जिनमें फैट, नमक और चीनी की मात्रा ज्यादा होती है। ब्रिटिश सरकार ने इसे बच्चों की सेहत बचाने की दिशा में निर्णायक कदम बताया है।

सरकार का मानना है कि बच्चे टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर दिखने वाले रंगीन और आकर्षक विज्ञापनों से जल्दी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि फास्ट फूड, चॉकलेट, शुगर ड्रिंक्स और स्नैक्स की खपत बढ़ रही है। नए नियम के तहत ऐसे सभी विज्ञापन प्राइम टाइम से पहले पूरी तरह बंद रहेंगे, ताकि बच्चों तक इनका असर कम किया जा सके।

ब्रिटेन इससे पहले भी सख्त कदम उठा चुका है। मिल्कशेक, रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी और मीठे दही पेय जैसे प्री-पैकेज्ड प्रोडक्ट्स पर शुगर टैक्स बढ़ाया गया था। इसका मकसद साफ था—लोगों को ज्यादा चीनी वाले उत्पादों से दूर रखना।

ब्रिटेन अकेला देश नहीं है। चिली ने बच्चों को निशाना बनाने वाले जंक फूड विज्ञापनों पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे वहां जंक फूड की खपत में साफ गिरावट देखी गई। मैक्सिको ने मीठे पेयों पर टैक्स लगाया और स्कूल परिसरों में जंक फूड पर रोक लगाई। वहीं दक्षिण कोरिया और ताइवान में बच्चों के कार्यक्रमों के दौरान ऐसे विज्ञापनों पर कड़ी शर्तें हैं। कनाडा के क्यूबेक प्रांत में तो 1980 के दशक से ही यह नियम लागू है।

भारत की स्थिति थोड़ी अलग है। भारत में बच्चों और किशोरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि कम उम्र में टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियां और फैटी लिवर अब आम होती जा रही हैं। इसके बावजूद टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर जंक फूड के विज्ञापन लगातार बच्चों तक पहुंच रहे हैं।

भारत में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने दिशानिर्देश जरूर बनाए हैं, लेकिन ये ज्यादातर स्व-नियमन तक सीमित हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री और प्रचार रोकने के प्रस्ताव दिए, मगर देशभर में एक जैसे सख्त नियम अब तक लागू नहीं हो पाए हैं।

ब्रिटेन का फैसला अब भारत समेत कई देशों के लिए एक उदाहरण बनता दिख रहा है।

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