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तापमान में गिरावट से बढ़ी ठंड, लोहरदगा के किसानों के लिए अलर्ट जारी

Lohardaga News: लोहरदगा जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है,

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Lohardaga News: लोहरदगा जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसानों के हित में जिले के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. किरण सिंह के द्वारा आवश्यक कृषि सलाह जारी की गई है।

उन्होंने बताया कि कम तापमान और नमी के कारण फसलों में तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए समय पर उचित प्रबंधन जरूरी है। डॉ. किरण सिंह के द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि सब्जियों एवं अन्य खड़ी फसलों में सुबह के समय हल्की सिंचाई करें, जिससे ठंड से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। सब्जियों की नर्सरी में खराब अंकुरण से बचाव हेतु कम लागत वाले पॉलिथीन कवर का उपयोग करें। देर से बोई गई गेहूं की फसल यदि 21 से 25 दिन की अवस्था में हो तो आवश्यकतानुसार पहली सिंचाई करें। सिंचाई के 3–4 दिन बाद नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा का छिड़काव करें। गेहूं में खर पतवार नियंत्रण के लिए मेटा सल्फ्यूरॉन 8 ग्राम प्रति 150 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करने की सलाह डॉ. किरण सिंह के द्वारा दी गई है।

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चना फसल में फली छेदक कीट की निगरानी के लिए फूल आने की अवस्था (10–15 प्रतिशत) पर प्रति एकड़ 3–4 फेरोमोन ट्रैप लगाने को कहा गया है। वहीं समय से बोई गई सरसों की फसल में यदि पौधे अत्यधिक सघन हों तो विरलीकरण सुनिश्चित करें। इस अवस्था में लाही कीट से बचाव हेतु इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह डॉ. किरण सिंह के द्वारा दी गई है।

कहीं-कहीं आलू की फसल में अंगमारी रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। ऐसे में रोग के लक्षण दिखाई देते ही रीडोमिल फफूंदनाशी दवा का छिड़काव 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से करें। गोभी एवं गोभीवर्गीय फसलों में लाही कीट के संभावित प्रकोप को देखते हुए क्विनोल्फोस 25 प्रतिशत ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह भी डॉ. किरण सिंह के द्वारा दी गई है। इसके अलावा टमाटर की फसल में मुरझाने की समस्या पर नियंत्रण के लिए तांबा आधारित फफूंदनाशी एवं स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर 2–3 बार छिड़काव करने तथा रोगग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करने का निर्देश डॉ. किरण सिंह के द्वारा दिया गया है। प्रधान कृषि वैज्ञानिक ने किसानों से अपील की है कि मौसम की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक सलाह का पालन करें, ताकि फसलों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

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