UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य इकाई के नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। लखनऊ से मिल रही जानकारी के अनुसार, पार्टी की राज्य इकाई ने छह वरिष्ठ नेताओं के नामों की सूची पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है। इसमें सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए दो ब्राह्मण, दो ओबीसी और दो दलित नेताओं को शामिल किया गया है।
किसे मिलेगी जिम्मेदारी? दावेदारों की सूची में कई दिग्गज
भाजपा की ओर से जो छह नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
- दिनेश शर्मा (पूर्व उप मुख्यमंत्री, ब्राह्मण)
- हरीश द्विवेदी (पूर्व सांसद, ब्राह्मण)
- धर्मपाल सिंह (वर्तमान कैबिनेट मंत्री, लोध/ओबीसी)
- बीएल वर्मा (केंद्रीय राज्य मंत्री, लोध/ओबीसी)
- रामशंकर कठेरिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री, दलित)
- विद्या सागर सोनकर (एमएलसी, दलित)
इन सभी नामों में से किसी एक को यूपी भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले एक-दो हफ्तों में भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष सामने आ जाएगा।
जातीय संतुलन और अनुभव दोनों का हो रहा मूल्यांकन
भाजपा नेतृत्व सामाजिक संतुलन के साथ-साथ अनुभव, संगठन क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव को भी देख रहा है।
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दिनेश शर्मा को आरएसएस का समर्थन प्राप्त है और वे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं।
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हरीश द्विवेदी ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।
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धर्मपाल सिंह का मंत्री के तौर पर लंबा अनुभव है।
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बीएल वर्मा संगठन के साथ आरएसएस के विश्वसनीय चेहरे हैं।
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रामशंकर कठेरिया अपनी आक्रामक हिंदुत्व छवि और दलित नेतृत्व के लिए पहचाने जाते हैं।
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विद्या सागर सोनकर जमीनी नेता हैं और पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार माने जाते हैं।
पश्चिम से पूर्व तक नेतृत्व बदलने की तैयारी
फिलहाल यूपी भाजपा की कमान पश्चिम उत्तर प्रदेश से आने वाले भूपेन्द्र चौधरी के पास है, जो जाट समुदाय से आते हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पूर्वांचल या केंद्रीय यूपी से हो सकती है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
भाजपा नेतृत्व 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह फैसला कर रहा है, ताकि संगठन को पहले से मजबूत किया जा सके। वहीं, पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में झेले झटके को भी बैलेंस करना चाहती है।



