अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार और घूसखोरी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने हरियाणा कैडर के 2012 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी पुडुचेरी में सामने आए करोड़ो रुपये के नकली दवा बनाने के गिरोह (Counterfeit Drug Racket) से जुड़े आरोपियों को राहत दिलाने के बदले 3 करोड़ रुपये की मोटी रिश्वत मांगने के आरोप में की गई है।
आईपीएस दीपक गहलावत वर्तमान में दिल्ली में ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) यानी नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। आरोप है कि गहलावत ने अपनी आधिकारिक स्थिति और रसूख का हवाला देकर सीबीआई के ही एक मामले में फंसे आरोपियों को क्लीन चिट या राहत दिलवाने का झांसा दिया था।
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला पुडुचेरी में बड़े पैमाने पर चल रहे नकली दवा निर्माण के अवैध कारोबार से जुड़ा है। इस मामले की जांच पहले से ही सीबीआई कर रही थी। इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल पुडुचेरी के एक बड़े कारोबारी एन. राजा उर्फ राजशेखर ने खुद को इस मामले से बचाने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू किया था। इसी दौरान राजा की मुलाकात दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से हुई। इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने राजा को भरोसा दिलाया कि वह अपने संपर्कों के जरिए सीबीआई की जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
सीबीआई के मुताबिक, इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने ही कारोबारी राजा की मुलाकात आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत से एरोसिटी के पास एक दफ्तर में करवाई थी। इस मुलाकात के दौरान आईपीएस गहलावत ने राजा को सीबीआई जांच में मदद करने का आश्वासन दिया और इसके एवज में 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। उन्होंने शर्त रखी थी कि कुल रकम का आधा हिस्सा यानी 1.5 करोड़ रुपये एडवांस के रूप में देने होंगे।
हवाला के जरिए हुआ लेनदेन, जाल बिछाकर हुई गिरफ्तारियां
कारोबारी राजा ने इस डील को पक्का करने के लिए चेन्नई के एक हवाला ऑपरेटर की मदद ली और करीब 1 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली भिजवाई। यह रकम दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को मिली, जिसने इसमें से 50 लाख रुपये आईपीएस अधिकारी के करीबी बिचौलिए प्रभात तक पहुंचाए। बाकी के 25 लाख रुपये इंस्पेक्टर ने अपने दफ्तर में रख लिए थे।
इसी बीच भनक लगते ही सीबीआई की एंटी करप्शन विंग ने जून महीने में एक बड़ा जाल बिछाया था। सीबीआई ने जाल बिछाकर सबसे पहले दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और बिचौलिए राजकुमार को रंगे हाथों दबोचा था। उस कार्रवाई में करीब 25 लाख रुपये की ट्रैप मनी और 90 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद की गई थी।
तभी से आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत जांच एजेंसी के रडार पर थे। उनसे कई दौर की पूछताछ की गई और आखिरकार सबूतों के आधार पर सीबीआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद गहलावत के ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है, जिसमें कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट में सीबीआई या अन्य विभागों के कौन-कौन से अंदरूनी अधिकारी शामिल थे।

