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29वां रोजा मुकम्मल, नहीं हुआ चाँद का दीदार, 21 मार्च को ईद

रांची: बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल की प्रमुख धार्मिक संस्था इमारत शरिया (फुलवारी शरीफ) ने आज ईद-उल-फितर के चाँद को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। मरकजी दारुल कजा के काजी-ए-शरीयत हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अंजार आलम कासमी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया

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रांची: बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल की प्रमुख धार्मिक संस्था इमारत शरिया (फुलवारी शरीफ) ने आज ईद-उल-फितर के चाँद को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। मरकजी दारुल कजा के काजी-ए-शरीयत हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अंजार आलम कासमी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि आज, 19 मार्च 2026 (जुमेरात) को शव्वाल का चाँद कहीं भी नजर नहीं आया है।

देशभर में की गई चाँद की तलाश

काजी-ए-शरीयत ने बताया कि आज रमजानुल मुबारक की 29वीं तारीख थी। परंपरा के अनुसार, इमारत शरिया के फुलवारी शरीफ स्थित मुख्यालय सहित इसकी सभी शाखाओं और देश के विभिन्न हिस्सों में चाँद देखने का विशेष इंतजाम किया गया था। देर शाम तक आसमान पर नजरें टिकी रहीं और अन्य राज्यों की हिलाल कमेटियों से भी संपर्क साधा गया, लेकिन कहीं से भी चाँद देखे जाने की कोई पुख्ता सूचना प्राप्त नहीं हुई।

30 रोजे होंगे पूरे, शनिवार को मनेगा जश्न

धार्मिक नियमों और 30 दिन की मुकम्मल रुयत (चाँद देखने की गणना) के आधार पर यह तय किया गया है कि शव्वाल 1447 हिजरी की पहली तारीख 21 मार्च 2026, शनिवार को होगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस साल रमजान का महीना पूरे 30 दिनों का होगा और जुमे (शुक्रवार) को आखिरी रोजा रखा जाएगा। शनिवार की सुबह देशभर की ईदगाहों और मस्जिदों में ईद-उल-फितर की नमाज अदा की जाएगी।

इमारत शरिया की अपील

इमारत शरिया के नायब काजी मुजीब उर रहमान कासमी ने सभी मुसलमानों से अपील की है कि वे शनिवार को आपसी भाईचारे और सादगी के साथ ईद का त्योहार मनाएं। चाँद न दिखने की सूचना मिलते ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में ईद की तैयारियों की गहमागहमी थोड़ी शांत हुई, लेकिन शनिवार के जश्न को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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