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100 आदिवासी बालिकाओं को मिल रहा हॉकी प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष फोकस

Khunti : रनिया और कर्रा प्रखंडों की 100 आदिवासी बालिकाओं के लिए खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस महत्वपूर्ण

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Khunti : रनिया और कर्रा प्रखंडों की 100 आदिवासी बालिकाओं के लिए खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस महत्वपूर्ण पहल के तहत इन बच्चियों को पेशेवर हॉकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर मौजूद प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है।

प्रशिक्षण में शामिल सभी बच्चियों को संपूर्ण हॉकी किट उपलब्ध कराई गई है, जिसमें स्टिक, जर्सी, शूज और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। इससे वे बिना किसी संसाधन की कमी के आत्मविश्वास के साथ अपना खेल निखार रही हैं। हॉकी कोच दशरथ महतो के अनुसार, इस पहल ने आदिवासी बेटियों में खेल के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह जगाया है। कई बालिकाएं राष्ट्रीय स्तर तक खेलने का सपना देख रही हैं, जिसे यह कार्यक्रम मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिकाओं के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसी मकसद से गुरुवार को रनिया प्रखंड के तांबा हॉकी सेंटर में एक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चियों का स्वास्थ्य परीक्षण, फिटनेस मूल्यांकन और पोषण स्तर की विस्तृत जांच की। डॉक्टरों ने उनकी शारीरिक जरूरतों के अनुसार सुझाव भी दिए, ताकि प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों को किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना न करना पड़े।

कार्यक्रम के तहत हर माह सभी चयनित बालिकाओं को पोषण किट भी प्रदान की जा रही है, जिसमें आयरन युक्त खाद्य पदार्थ, प्रोटीन सप्लीमेंट और अन्य आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं। इसका उद्देश्य खेल के साथ-साथ उनकी शारीरिक मजबूती और पोषण स्थिति को बेहतर बनाना है।

CRY और GRSE की यह संयुक्त पहल खूंटी जिले की आदिवासी लड़कियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। ग्रामीण क्षेत्र की ये बच्चियां पहली बार किसी संगठित खेल प्रशिक्षण से जुड़ रही हैं, जो न केवल उनकी प्रतिभा को दिशा देगा, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी को भी बढ़ाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह प्रयास लगातार जारी रहा, तो खूंटी की बेटियां आने वाले समय में राज्य और देश के लिए हॉकी की नई पहचान बन सकती हैं।

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